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Monday, March 30, 2026
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कूड़े का ढेर, सुअरों का झुंड… स्वर्ग जैसे कसोल का हाल देख आप भी कहेंगे- नहीं जाना यहां

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कुल्लू:

हिमाचल प्रदेश की पार्वती घाटी में स्थित कसोल हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के कारण चर्चा में है। इन वीडियो में कसोल के एक वन क्षेत्र में भारी मात्रा में कचरा जमा हुआ दिखाया गया है, जिससे क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता खतरे में पड़ गई है। प्लास्टिक की थैलियों, बोतलों और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे के ढेर ने लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है और कचरा प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक व्यक्ति कसोल की बिगड़ती स्थिति पर दुख और निराशा व्यक्त कर रहा है। कूड़े के इस ढेर पर सुअर मुंह मारते हुए दिखाई दे रहे हैं।

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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल हुए वीडियो ने इस मुद्दे को उजागर किया है। वीडियो में प्लास्टिक की थैलियों और बोतलों का अंबार देखा जा सकता है, जो कभी हरे-भरे क्षेत्र को दूषित कर रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में शख्स कह रहा है कि बहुत गंदी बदबू है। कसोल पहले कितना सुंदर था और अब देखो कैसा है। ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर कमेंट कर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। कुछ लोग अधिकारियों की आलोचना कर रहे हैं, जबकि अन्य पर्यटकों के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार को दोषी ठहरा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
एक यूजर ने कटाक्ष करते हुए लिखा है कि जब एक असंवेदनशील भीड़ एक कामचोर प्रशासन से टकराती है, तो एक सिविक मास्टरपीस बनता है। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा कि यह प्रशासन की विफलता है, यह सरकार की विफलता है, यह उन पर्यटकों की विफलता है जो हिमाचल आकर इसे कूड़ेदान बना देते हैं। कुल मिलाकर, एक समाज के रूप में हम असफल हैं – असभ्य, अनुशासनहीन और प्रकृति को नष्ट करने वाले। बता दें कि कसोल में कचरे की समस्या लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन हाल के वीडियो ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया है। यह समस्या पर्यटकों की बढ़ती संख्या और उचित कचरा प्रबंधन प्रणाली की कमी के कारण और भी गंभीर हो गई है।

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कसोल में कचरा प्रबंधन की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। कचरा इधर-उधर फेंक दिया जाता है, जिससे प्रदूषण फैलता है। पर्यटकों को भी कचरा इधर-उधर नहीं फेंकने के लिए जागरूक नहीं किया जाता है। कसोल में कचरे की समस्या को हल करने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर कचरा प्रबंधन की उचित व्यवस्था करनी चाहिए। पर्यटकों को भी कचरा इधर-उधर नहीं फेंकने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए। कसोल को अपनी प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने के लिए कचरे की समस्या से निपटना होगा। यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो कसोल अपनी पहचान खो देगा।

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