भोपाल।
मध्य प्रदेश में माननीयों का वेतन बढ़ाने की तैयारी हो चुकी है। विधायकों के वेतन में 60 हजार रुपए की बढ़ोतरी होगी। अब उन्हें 1 लाख 70 हजार रुपए मिलेंगे। वहीं, पूर्व विधायकों का पेंशन भत्ता 58 हजार करने पर सहमति बनी है। वहीं मुख्यमंत्री, मंत्री और राज्य मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष की सैलरी भी 18 से 30 फीसदी बढ़ाई जाएगी। संसदीय कार्य विभाग ने गुरुवार को इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे सैद्धांतिक सहमति के लिए मुख्यमंत्री के पास भेजा जा रहा है।
सरकार की कोशिश है कि माननीयों के वेतन-भत्तों में बढ़ोत्तरी से संबंधित विधेयक 1 दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में लाया जाए। बता दें कि मध्य प्रदेश में 9 साल बाद विधायक और मंत्रियों के वेतन में बढ़ोतरी होगी। पड़ोसी राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले ही माननीयों के वेतन में बढ़ोतरी कर चुके हैं। पढ़िए रिपोर्ट विधानसभा में अध्यक्ष ने की थी घोषणा दरअसल, इसी साल बजट सत्र के दौरान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार व अन्य विधायकों ने सदन में वेतन-भत्ते बढ़ाने की मांग की थी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने आसंदी से कहा कि यदि सरकार विधायकों के वेतन भत्ते बढ़ाने पर विचार करने के लिए समिति का गठन करें तो विधानसभा अपनी सिफारिश भेज सकती है। इस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सहमति जताई।
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इसके बाद 27 अक्टूबर को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इस कमेटी में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के अलावा बीजेपी विधायक अजय विश्नोई और खरगोन जिले के कसरावद से विधायक सचिन यादव को सदस्य के रूप में शामिल किया गया। संसदीय कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन को सदस्य सचिव बनाया गया। कमेटी ने अपना प्रस्ताव भेजा कमेटी ने दो दौर की चर्चा कर वेतन, भत्ते और पेंशन में बढ़ोतरी संबंधी प्रस्ताव तैयार कर अपनी सिफारिश राज्य शासन को भेजी। इसमें पूर्व विधायकों की पेंशन राशि में वृद्धि का प्रस्ताव भी शामिल किया गया था, लेकिन सरकार की तरफ से कहा गया कि इसमें मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के वेतन-भत्ते बढ़ाने पर भी विचार किया जाए, इसके बाद नए सिरे से कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया।
