भोपाल!
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार देश के ‘नंबर टू’ उद्योगपति अब भोपाल की फिजाओं में तगड़ी एंट्री लेने वाले हैं। उनके लिए वल्लभ भवन के गलियारों में “दिन को रात और रात को दिन” किया जा रहा है। पर्दे के पीछे से शासन के तीन प्रमुख विभाग—इंडस्ट्री, रेवेन्यू और अर्बन डेवलपमेंट—उस बेशकीमती जमीन का विवाद सुलझाने में लगे हैं, जिस पर दशकों से बड़े-बड़े सूरमाओं की नजर थी। ताज्जुब तो यह है कि नीचे के बाबुओं को यह तक नहीं पता कि यह ‘बेगारी’ किसके लिए हो रही है। भेल (BHEL) की हजारों एकड़ जमीन पर कई वर्षों से कोर्ट-कचहरी और फाइलों की दौड़ जारी थी, लेकिन जैसे ही ‘बड़े सेठ’ की नजर इनायत हुई, रातों-रात ‘इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी’ के नियम बदल दिए गए। चूंकि निर्देश सीधे ‘दिल्ली दरबार’ से आए हैं, इसलिए भेल प्रबंधन को भी पीछे हटने का इशारा मिल गया है। बहुत जल्द आपको सुनने को मिलेगा कि मामला ‘आउट ऑफ कोर्ट’ सेटल हो गया और कोर्ट के रास्ते उद्योगपति को जमीन आवंटन का प्रस्ताव मेज पर होगा।
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