भोपाल ।
मध्यप्रदेश सरकार की शांति, विकास और आत्मसमर्पण-समर्पण नीति को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। प्रदेश में सक्रिय नक्सली समूहों पर प्रभावी कार्रवाई और लगातार दबाव के बीच 10 नक्सलियों ने मुख्यमंत्री की उपस्थिति में अपने हथियार डाल दिए। आत्मसमर्पण करने वालों में कई ऐसे नक्सली शामिल हैं, जिन पर विभिन्न राज्यों द्वारा इनाम घोषित था और जो लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने हुए थे।
नक्सली गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई का परिणाम प्रदेश पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने हाल के वर्षों में नक्सली गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए संयुक्त रणनीति अपनाई है। जंगलों में तलाशी अभियान तेज किए गए हैं, निरंतर खुफिया निगरानी बढ़ाई गई है, और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई है। इसका परिणाम यह हुआ कि नक्सलियों का संगठन कमजोर होने लगा और आत्मसमर्पण की प्रवृत्ति बढ़ी है।
सरकार के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास नीति के तहत सभी आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि वे मुख्यधारा में शामिल होकर सामान्य जीवन जी सकें। विभिन्न राज्यों में भी हो रहे आत्मसमर्पण रिपोर्ट के अनुसार देश के कई राज्यों—जैसे छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा—में भी नक्सली आत्मसमर्पण की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ी हैं। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल के कारण नक्सल उन्मूलन अभियान को और मजबूती मिली है।
पिछले कुछ वर्षों में नक्सलियों का आधार क्षेत्र, जनसमर्थन और सशस्त्र ताकत लगातार घट रही है। 2025 तक नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य सरकार द्वारा तय रोडमैप के अनुसार 2025 तक देश को नक्सलवाद मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जा रही है, सड़क और संचार जैसे बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है, तथा प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को प्राथमिकता दी जा रही है।
