भोपाल
राजधानी के दशहरा मैदान में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा समारोह-2026 के मंच पर उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक परिषद, बीएचईएल भोपाल ने अपनी कलात्मक प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया। परिषद ने भोजपुरी और बुंदेली बोलियों की सांस्कृतिक समृद्धि को ‘मातृशक्ति’ के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
लोकगीतों और नृत्यों का संगम परिषद की ओर से पूर्वी, भोजपुरी और बुंदेली बोलियों पर आधारित कजरी, झूमर और मेघ मल्हार लोकगीतों पर केंद्रित समेकित नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस दौरान बुंदेली सोहर: बुंदेलखंड क्षेत्र में विवाह और संतान जन्म पर गाए जाने वाले इस पारंपरिक गीत ने क्षेत्रीय संस्कृति का सजीव चित्र प्रस्तुत किया।
कजरी और झूमर: सावन की फुहारों और महिलाओं के अनुभवों को दर्शाने वाले कजरी गीतों एवं झूमर शैली ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन कलाकारों ने दी मनमोहक प्रस्तुति परिषद के सचिव सुनील विश्वकर्मा ने बताया कि इस सफल प्रस्तुति में रोमा सिंह (कोरियोग्राफर), नेहा मौर्या, सौम्या मौर्या, संगीता मौर्या, प्रिया दास, सुचिता मल्ल, रितु पाण्डेय और सरिता कन्नौजिया ने हिस्सा लिया।
नन्ही बालिकाओं में आरोही सिंह, आयुषी मौर्या और अंजलि विश्वकर्मा की भागीदारी सराहनीय रही। वरिष्ठ जनों की रही उपस्थिति कार्यक्रम में परिषद के अध्यक्ष राम प्रताप मौर्या, रजनीकांत चौबे, अनिल मौर्या सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। परिषद के संरक्षक दिनेश कुमार त्रिपाठी और दुर्गेश कुमार श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। समापन पर ‘मातृभाषा मंच’ द्वारा सभी कलाकारों को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। सहयोग: मातृभाषा मंच की ओर से अमिताभ सक्सेना, विनोद, हरीश और अर्पित जोशी का विशेष सहयोग रहा। यह आयोजन मातृभाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ।
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