भोपाल
राजधानी की जीवनरेखा ‘बड़ा तालाब’ को भू-माफियाओं के चंगुल और प्रदूषण की मार से बचाने के लिए सोमवार को कलेक्टर कार्यालय में एक हाई-प्रोफाइल बैठक आयोजित की गई। सांसद आलोक शर्मा के कड़े तेवरों और कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह की सख्ती ने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया। बैठक में तब असहज स्थिति निर्मित हो गई जब कलेक्टर के सवालों पर एसडीएम निरुत्तर नजर आए और टीएंडसीपी के नक्शे के अनुसार मार्किंग न कर पाने का बहाना बनाने लगे।
एसडीएम एक-दूसरे की बगलें झांकते रहे
बैठक में जब कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह ने तालाब किनारे से हटाए गए और शेष बचे अतिक्रमण का ब्यौरा मांगा, तो तीनों एसडीएम ठोस जानकारी नहीं दे पाए। अधिकारियों ने तर्क दिया कि वे नक्शे के अनुसार मार्किंग नहीं कर पाए हैं। इस पर नाराजगी जताते हुए कलेक्टर ने स्पष्ट आदेश दिए कि एक हफ्ते के भीतर सभी ‘मेजर प्राइमा फेसी’ (प्राथमिक तौर पर दिखने वाले) अतिक्रमण हटाए जाएं। अब हर सप्ताह इस पर समीक्षा बैठक होगी।
“तालाब किनारे ड्रग्स पार्टियां बर्दाश्त नहीं”
सांसद आलोक शर्मा ने बैठक में बेहद गंभीर मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि तालाब के किनारे बने अवैध फार्म हाउसों में ड्रग्स की पार्टियां चल रही हैं, जो शहर के लिए शर्मनाक है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसे समय रहते नहीं रोका गया, तो भोपाल की संस्कृति खतरे में पड़ जाएगी।
वक्फ बोर्ड और लैंड जिहाद पर तीखा प्रहार
सांसद शर्मा ने अपने संबोधन में वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा:
“आज पूरा भोपाल वक्फ बोर्ड की जागीर बनता जा रहा है। मेट्रो लाइन हो, स्मार्ट रोड हो या सब्जी मंडी की जगह बस स्टैंड का निर्माण—हर जनहित के कार्य में वक्फ की जमीन बताकर अड़ंगा डाला जाता है। अब ‘इनायत हिब्बे’ और ‘लैंड जिहाद’ के नाम पर गुंडागर्दी की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
घटता क्षेत्रफल और विलुप्त होती जैवविविधता
सांसद ने आंकड़ों के जरिए बताया कि 30 वर्षों में तालाब का क्षेत्रफल 39.8 वर्ग किमी से घटकर 29.8 वर्ग किमी रह गया है। उन्होंने चिंता जताई कि:
तालाब का वास्तविक भराव क्षेत्र अब महज 8-9 किमी में सिमट गया है।
सारस क्रेन, व्हाइट स्टॉर्क और हंस जैसे दुर्लभ पक्षियों का बसेरा संकट में है।
सेप्ट (CEPT) और केपीएमजी की रिपोर्ट सार्वजनिक होनी चाहिए।
तालाब के किनारे लगी पीली मुनारें (सीमांकन पत्थर) उखाड़ दी गई हैं, जिनका पुन: सर्वे अनिवार्य है।
नगर निगम से मांगे जवाब
सांसद ने नगर निगम के अधिकारियों से पूछा कि बड़े तालाब में मिलने वाले गंदे नालों को रोकने के लिए अब तक कितने एसटीपी (STP) बनाए गए और भविष्य की क्या योजना है? उन्होंने मांग की कि तालाब का नए सिरे से ‘मास्टर प्लान’ तैयार किया जाए ताकि विरासत और विकास का संतुलन बना रहे।
बैठक में ये रहे उपस्थित:
बैठक में कलेक्टर कौशलेंद्र सिंह के साथ एडीएम अंकुर मेश्राम, नगर निगम अपर आयुक्त तन्मय वशिष्ठ शर्मा, पूर्व बीडीए अध्यक्ष कृष्णमोहन सोनी, चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष गोविंद गोयल, क्रेडाई अध्यक्ष मनोज मीक, डॉ. अनूप हजेला, पर्यावरण मित्र सुयश कुलश्रेष्ठ सहित प्रदूषण बोर्ड और राजस्व विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्य मांगें एक नज़र में:
तालाब का नए सिरे से मास्टर प्लान बने।
सभी पुरानी सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं।
भदभदा प्रेमपुरा से शेष 26 झुग्गियां तत्काल हटें।
कानून का उल्लंघन करने वालों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो।
Read Also :- बाबूलाल गौर महाविद्यालय के एनएसएस शिविर का ग्राम पिरिया में शुभारंभ
