मिडिल ईस्ट में इस वक्त हालात ‘करो या मरो’ वाले हो चुके हैं। ऐसा लग रहा है कि महायुद्ध की चिंगारी बस सुलगने ही वाली है। तेहरान के अड़ियल रुख को देखते हुए अमेरिका ने ईरान की ऐसी घेराबंदी की है कि परिंदा भी पर न मार सके। इस क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों का आंकड़ा 50,000 के पार पहुंच गया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की ताजा रिपोर्ट ने दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं, क्योंकि हाल ही में 2,500 मरीन कमांडो और 2,500 नौसेना कर्मियों की नई खेप इस फ्रंट पर पहुंच चुकी है। अब सबकी नजरें राष्ट्रपति ट्रंप पर हैं, जिनका एक फैसला पूरे नक्शे को बदल सकता है।
क्या इतनी छोटी फौज से ईरान को काबू कर पाएंगे ट्रंप?
सैन्य विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई है कि क्या सिर्फ 50,000 सैनिक ईरान जैसे विशाल और भौगोलिक रूप से जटिल देश को घुटनों पर लाने के लिए काफी हैं? हालांकि, ये कोई आम सैनिक नहीं हैं, बल्कि आधुनिक हथियारों से लैस अमेरिका की सबसे घातक टुकड़ियां हैं। पेंटागन ने जिस तरह से ईरान के चारों तरफ अपनी पकड़ मजबूत की है, उससे साफ है कि ट्रंप अब बातचीत के मूड में कम और ‘एक्शन’ के मूड में ज्यादा दिख रहे हैं।
2,000 एलीट पैराट्रूपर्स की तैनाती ने उड़ाई ईरान की नींद
खबर है कि पेंटागन ने गुपचुप तरीके से अपनी सबसे खतरनाक 82nd एयरबोर्न डिवीजन के 2,000 एलीट पैराट्रूपर्स को मिडिल ईस्ट भेज दिया है। इनकी लोकेशन को ‘टॉप सीक्रेट’ रखा गया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि ये किसी भी वक्त आसमान से सीधा ईरानी ठिकानों पर हमला बोल सकते हैं। ये पैराट्रूपर्स अंधेरे में और बेहद कठिन परिस्थितियों में दुश्मन के इलाके में घुसकर कब्जा करने में माहिर हैं। इनकी मौजूदगी का मतलब साफ है—जल्द ही कोई बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक देखने को मिल सकता है।
तेल के सबसे बड़े केंद्र पर कब्जे का ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार
ट्रंप प्रशासन का मुख्य लक्ष्य ईरान की आर्थिक कमर तोड़ना है, और इसके लिए खर्ग आइलैंड (Kharg Island) सबसे आसान निशाना है। यह द्वीप ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है। अगर अमेरिका इस पर कब्जा कर लेता है, तो ईरान की कमाई का जरिया पूरी तरह बंद हो जाएगा। अमेरिकी लड़ाकू विमान पहले ही ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों पर बमबारी कर चुके हैं, और अब मरीन कमांडो के साथ मिलकर ये पैराट्रूपर्स जमीन पर मोर्चा संभालने की तैयारी में हैं।
ग्लोबल इकोनॉमी को बचाने के लिए मरीन कमांडो ‘स्टैंडबाय’ पर
दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते गुजरता है, जिसे फिलहाल ईरानी सेना के हमलों के कारण बंद कर दिया गया है। इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में आग लग गई है। ट्रंप ने अपनी ’31st मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट’ को स्टैंडबाय पर रखा है। ये कमांडो समुद्र के बीचों-बीच ऑपरेशन चलाने और छोटे द्वीपों पर कब्जा करने में माहिर हैं। इनका मकसद हर हाल में तेल के इस रास्ते को फिर से खोलना है।
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ट्रंप के एक ‘ग्रीन सिग्नल’ का इंतजार और ईरान का पलटवार
युद्ध शुरू हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन वाशिंगटन और तेहरान के बीच सीधी बातचीत का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। हालांकि पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश बीच-बचाव की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप और ईरानी नेता अपने-अपने स्टैंड पर अड़े हुए हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरीन जीन-पियरे ने इन तैयारियों को ‘रूटीन’ बताया है, लेकिन हकीकत में पेंटागन राष्ट्रपति को हमले के तमाम विकल्प दे रहा है। अगर ट्रंप ने हरा झंडा दिखाया, तो ईरान भी अपनी मिसाइल ताकत से जोरदार पलटवार करने की क्षमता रखता है, जिससे यह जंग लंबी और खौफनाक हो सकती है।
