देवास। जिले में हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में पांच मजदूरों की दर्दनाक मौत और आठ की गंभीर हालत के बाद अब प्रशासनिक निगरानी और लाइसेंस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे की जांच के दौरान ब्लास्ट साइट से करीब दो किलोमीटर दूर गांव कलमा के पास आगरा-मुंबई हाईवे किनारे स्थित एक वेयर हाउस (गोदाम) की गतिविधियां भी गहरी संदिग्धता के घेरे में आ गई हैं। हालांकि शुरुआती जांच में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने दावा किया था कि वहां केवल तैयार पटाखों और पैकिंग के कार्टन का वैध स्टॉक रखा है, लेकिन वेयर हाउस के भीतर से सामने आई तस्वीरें और वीडियो अधिकारियों के इन दावों पर बड़े सवालिया निशान लगा रहे हैं।
आशंका जताई जा रही है कि इस वेयर हाउस में भी अवैध रूप से पटाखा निर्माण या खतरनाक रसायनों का भंडारण किया जा रहा था। संदेह होने पर जब एसडीओपी दीपा मांडवे की टीम ने ताला तोड़कर इस वेयर हाउस की विस्तृत जांच की, तो अंदर ऐसे कई पुख्ता सुराग मिले जो सीधे तौर पर हादसे वाली फैक्ट्री से मेल खाते हैं। वेयर हाउस में सामान की आड़ में स्टील के वही बड़े कंटेनर छिपाकर रखे मिले हैं, जैसे कंटेनर में मुख्य फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ था। इसके अलावा, फैक्ट्री में मिले सफेद रंग के कट्टे जिन पर लाल रंग से ‘REGULAR’ लिखा था, वे भी यहां भारी मात्रा में पाए गए हैं।
इतना ही नहीं, गत्तों के नीचे छिपाकर रखी गईं सफेद बोरियां भी मिली हैं, जिनमें पोटाश या अन्य विस्फोटक केमिकल होने की आशंका है। वेयर हाउस के भीतर लंबी टेबल और कुर्सियों की व्यवस्था यह इशारा करती है कि यहां एक साथ कई लोग बैठकर पटाखों की पैकिंग या निर्माण का काम करते थे। इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा ग्राम पंचायत कलवां की सरपंच कविता गौड़ ने किया है। सरपंच का दावा है कि उन्होंने मार्च 2026 में ही इस जयदेव वेयर हाउस में अवैध पटाखा फैक्ट्री संचालित होने की लिखित शिकायत तहसीलदार सहित कई स्तरों पर की थी।
शिकायत में साफ चेतावनी दी गई थी कि सामने पेट्रोल पंप और पास में आबादी होने से बड़ा हादसा हो सकता है। 14 मार्च को वहां एक छोटा विस्फोट भी हुआ था, लेकिन प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा नियमों को लेकर उठ रहा है; विस्फोटक नियम 2008 के तहत किसी भी पटाखा फैक्ट्री के लाइसेंस के लिए स्थानीय पंचायत या नगर परिषद की अनापत्ति (NOC) अनिवार्य है। जब सरपंच खुद इसका विरोध कर रही थीं, तो बिना पंचायत की मंजूरी के प्रशासन ने इस फैक्ट्री को लाइसेंस कैसे जारी कर दिया?
