भोपाल। राजधानी के 10 लेन अयोध्या बायपास प्रोजेक्ट के लिए काटे जा रहे हजारों पेड़ों को बचाने की मुहिम एक बार फिर तेज हो गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की दिल्ली बेंच से पर्यावरणीय शर्तों के साथ प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिलने के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने मशीनों से पेड़ों की कटाई तेज कर दी है। इसके विरोध में पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों द्वारा गुरुवार शाम 5 बजे एक अनूठा प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुटकर कटने जा रहे कुल 7,871 पेड़ों को फूल अर्पित कर मौन रूप से अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
पर्यावरणविद् उमाशंकर तिवारी और याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना का कहना है कि कागजों में भले ही पेड़ों की संख्या कम दिखाई गई हो, लेकिन हकीकत में 10 हजार से अधिक पेड़ काटे जा रहे हैं, जिनमें से कई पेड़ 40 से 100 साल पुराने हैं। पर्यावरण प्रेमियों का तर्क है कि 10 लेन सड़क बनाने के बजाय एलिवेटेड कॉरिडोर या सिक्सलेन का विकल्प चुनकर इन ऐतिहासिक पेड़ों को बचाया जा सकता था। करीब 836.91 करोड़ रुपए की लागत वाले इस 16 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट के तहत रत्नागिरि तिराहे से आसाराम तिराहे तक सड़क को सर्विस रोड सहित 10 लेन में बदला जा रहा है।
एनजीटी से अनुमति मिलने के बाद जमीनी स्तर पर काम काफी तेज हो गया है, जिससे मार्ग पर जगह-जगह डायवर्जन बनाए गए हैं और बैरिकेडिंग के कारण लेन संकरी हो गई है। इसके चलते इस व्यस्त मार्ग से रोजाना गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों को भारी ट्रैफिक जाम और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में जब तीन दिन के भीतर करीब आधे पेड़ काट दिए गए थे, तब भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद भोपाल एनजीटी ने इस पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में यह मामला दिल्ली बेंच में स्थानांतरित हो गया जहां से अब प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी गई है। इस मुद्दे पर कांग्रेस सहित विभिन्न सामाजिक संगठन भी पहले मास्क पहनकर विरोध प्रदर्शन दर्ज करा चुके हैं।
