भोपाल। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने राजधानी के मुगलिया छाप स्थित शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालय में मेस भुगतान के नाम पर 1.55 करोड़ रुपए के बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है। ईओडब्ल्यू की जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने मेस का ठेका लेने वाली असली कंपनी के नाम से सिर्फ ‘प्राइवेट लिमिटेड’ शब्द हटाकर एक मिलती-जुलती फर्जी फर्म बनाई और मिलीभगत कर सरकारी खजाने की रकम उसके खाते में ट्रांसफर कर दी।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में ईओडब्ल्यू ने धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत विद्यालय के तीन पूर्व प्राचार्यों—विजय सिंह महोबिया, संतोष सिंह सिसोदिया व वीरेंद्र दुबे, तत्कालीन लेखापाल लीना विश्वकर्मा, मुख्य साजिशकर्ता गौरव शर्मा, फर्जी फर्म संचालक हर्ष मरजानी और कर्मचारी कुलदीप शुक्ला सहित सात लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। जांच के अनुसार, वर्ष 2021 में इस आवासीय विद्यालय के मेस संचालन का ठेका ‘कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड’ को मिला था, जिसका भुगतान बैंक ऑफ बड़ौदा की गोवा शाखा स्थित कंपनी के अधिकृत खाते में होना था।
इसी कंपनी में सुपरवाइजर रहे आरोपी गौरव शर्मा ने वर्ष 2023 में हर्ष मरजानी के नाम पर ‘कनका फूड मैनेजमेंट सर्विसेस’ नाम से एक फर्जी फर्म तैयार करवाई और इसका खाता इंदौर के एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में खुलवा लिया। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन और आरोपियों की मिलीभगत का खेल शुरू हुआ। फाइलों और नोटशीट में तो असली कंपनी का नाम लिखा जाता था, लेकिन चेक जारी करते समय जानबूझकर ‘प्राइवेट लिमिटेड’ शब्द हटा दिया जाता था, ताकि बैंक से पूरी रकम सीधे फर्जी फर्म के खाते में ट्रांसफर हो जाए। इसी तरह 20-21 अक्टूबर 2023 को 21.95 लाख रुपए का पहला फर्जी भुगतान किया गया, जिसमें तत्कालीन लेखापाल लीना विश्वकर्मा ने खाता बदलने के लिए संयुक्त संचालक से अनिवार्य अनुमति भी नहीं ली थी।
