भोपाल। राजधानी में ‘भोपाल गौरव दिवस’ यानी भोपाल की आजादी का जश्न भोपाल गेट पर धूमधाम से मनाया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रगान के उपरांत महापौर मालती राय, एमआईसी सदस्य और अन्य गणमान्य नागरिकों ने गुब्बारे उड़ाकर और झंडावंदन कर भोपाल के स्वतंत्रता संग्राम को याद किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महापौर मालती राय ने एक महत्वपूर्ण मांग उठाते हुए कहा कि भोपाल की आजादी के इस गौरवशाली संघर्ष और बलिदान की गाथा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी अपनी माटी के इतिहास से रूबरू हो सके। उन्होंने याद दिलाया कि भारत भले ही 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था, लेकिन भोपाल तब भी नवाबी हुकूमत की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था।

तत्कालीन नवाब हमीदुल्ला खान भोपाल रियासत का विलय पाकिस्तान में करना चाहता था, जिसे भोपाल की राष्ट्रभक्त जनता ने पूरी तरह नकार दिया और एक ऐतिहासिक विलीनीकरण आंदोलन की शुरुआत हुई। महापौर मालती राय ने इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाले रतन कुमार गुप्ता सहित पं. उद्धव दास मेहता, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा, मास्टर लाल सिंह, नित्य गोपाल शर्मा, सूरजमल जैन, प्रोफेसर अक्षय कुमार, लक्ष्मी नारायण जैमिनी, प्रेम श्रीवास्तव, बालकृष्ण गुप्ता, जमुना प्रसाद मुखरैया तथा महिला विंग में बसंती देवी, शांति देवी, मोहिनी देवी और पुष्पा चारु के अविस्मरणीय व ऐतिहासिक योगदान को याद किया।
इस गौरवमयी अवसर पर महापौर ने विलीनीकरण आंदोलन के दौर के दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। साथ ही, बलिदानी और सेनानी परिवारों के सदस्यों— ईश दयाल शर्मा, डॉ. दीपक मेहता, आलोक गुप्ता, ललित जैन और योगेंद्र मुखरैया को शॉल व श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। आंदोलन का मुख्य केंद्र रहे जुमेराती स्थित पुराने पोस्ट ऑफिस में भी गौरव दिवस पर झंडावंदन कर मिष्ठान वितरण किया गया।
