भोपाल। राजधानी की गृह निर्माण समितियों में चल रहे फर्जीवाड़े और लेती-देती का एक बड़ा मामला मंगलवार को कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में गरमाया। रोहित हाउसिंग सोसायटी के करीब 300 सदस्य पिछले 15 सालों से अपनी ही जमा पूंजी के बदले प्लॉट आवंटन और रजिस्ट्री के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
सोसायटी ने इनसे पहले सदस्यता शुल्क और बाद में विकास शुल्क के नाम पर लाखों रुपए ऐंठ लिए, लेकिन आज तक जमीन का मालिकाना हक नहीं दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम सुमित पांडेय ने पीड़ितों को भूमि के सीमांकन का आश्वासन दिया है। सोसायटी के सदस्य अजय सक्सेना ने बताया कि वर्ष 2011-12 में सोसायटी ने विकास कार्य कराने और जल्द रजिस्ट्री का भरोसा देकर प्रत्येक सदस्य से 3.45 लाख रुपए से लेकर 4.5 लाख रुपए तक की अतिरिक्त राशि जमा कराई थी।
कई परिवारों ने पेट काटकर यह पूरी रकम जमा कर दी। जब सोसायटी सबको घर दिलाने में नाकाम रही, तो सहकारिता विभाग ने इसे अपने अधीन लेते हुए 2016 में यहाँ सरकारी प्रशासक नियुक्त कर दिया था। अचंभे की बात यह है कि करीब एक दशक से प्रशासक की नियुक्ति होने के बावजूद पात्र सदस्यों को उनके प्लॉट नहीं मिल सके हैं।
जनसुनवाई में पहुँचीं पीड़ित मंजू पाठक ने सोसायटी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन प्लॉटों का आवंटन वर्षों पहले पुराने सदस्यों के नाम पर किया गया था, उनमें से कई प्लॉटों की रजिस्ट्री बाद में आए नए लोगों के नाम पर कर दी गई। आवंटन और रजिस्ट्री की इस पूरी प्रक्रिया में वरिष्ठता (सीनियरिटी) के नियमों को ताक पर रख दिया गया। पीड़ितों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी खाली प्लॉटों और उपलब्ध भूमि की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट नहीं किया जा रहा है।
