भोपाल
नई दिल्ली स्थित ट्रांसपोर्ट भवन में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से बौद्ध धर्मगुरु भंते शाक्यपुत्र सागर थेरो (प्रधान भिक्षु, मध्य प्रदेश) ने सौहार्दपूर्ण भेंट की। यह मुलाकात भारत की बौद्ध विरासत के पुनर्जागरण और वैश्विक स्तर पर बौद्ध मूल्यों के प्रसार के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
पवित्र अवशेषों की प्रतिष्ठा हेतु आभार भंते शाक्यपुत्र सागर ने वर्ष 1898 में उत्तर प्रदेश के पिपरहवा स्तूप से प्राप्त प्राचीन बौद्ध अवशेषों को 127 वर्षों के पश्चात पुनः भारत की पावन भूमि पर प्रतिष्ठित कराने के लिए मंत्री शेखावत के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि तथागत गौतम बुद्ध से संबंधित इन पवित्र अवशेषों की वापसी करोड़ों बौद्ध अनुयायियों के लिए केवल ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि आस्था और आत्मिक गौरव का पुनरागमन है।
बौद्ध सर्किट और सांस्कृतिक कूटनीति पर चर्चा भेंट के दौरान संस्कृति मंत्रालय द्वारा बौद्ध धरोहरों के संरक्षण, प्राचीन स्तूपों के संवर्धन और बौद्ध सर्किट के समग्र विकास हेतु किए जा रहे कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की गई। भंते जी ने कहा कि श्री शेखावत के नेतृत्व में भारत पुनः विश्व बौद्ध धरोहर के केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है, जो प्रधानमंत्री के ‘शांति, करुणा और अहिंसा’ के संदेश को वैश्विक मंच पर मजबूती प्रदान कर रहा है।
प्रमुख उपस्थिति इस ऐतिहासिक अवसर पर हैदराबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं तेलंगाना राज्य विधानसभा अध्यक्ष के निजी सलाहकार राष्ट्रपाल चिकलवार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने भी भारत की प्राचीन परंपरा के संरक्षण और पुनरुत्थान की दिशा में इस पहल को मील का पत्थर बताया। “यह पहल न केवल भारत, बल्कि संपूर्ण विश्व को शांति और मानवता के सार्वकालिक मूल्यों की पुनः स्मृति कराती है। मंत्री जी का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा।”
Read Also :- भेल ऑफिसर्स क्लब, भोपाल में “ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट – 2026” का भव्य शुभारंभ, रिकॉर्ड सहभागिता के साथ
