भोपाल
भेल भोपाल यूनिट में कुछ अफसरों के सहयोग से कुछ ऐसे ठेकेदारों बल्ले-बल्ले हैं जिन्होंने अपनी पुरानी कंपनी ब्लेक लिस्ट होने के बाद नई कंपनी बना ली और फिर से करोड़ों के ठेके लेना शुरू कर दिये । ऐसा भी नहीं की भेल के अफसर ऐसे ठेकेदारों को जानते और पहचानते न हों। पुरानी कंपनी में मजदूरों के लाखों रूपये डकार गये यह ठेकेदार एक नई कंपनी बनाकर फैक्ट्री सिविल (एफसीएक्स)विभाग में लाखों का साफ-सफाई का ठेका ले डाला जबकि कारखाने में साफ-सफाई दूर-दूर तक नहीं दिखती है ।
यहीं नहीं मजदूरों के पीएफ व ईएसआईसी के लाखों रूपये डकारने वाले ठेकेदार साहब जब कंपनी ब्लेक लिस्ट हुई तब गुजरात भाग गये थे। लंबे समय बाद तब वापसी की जब उन्हें अपने चहेते अफसरों का इशारा हुआ फिर क्या था ठेकेदार साहब पूरी दमदारी के साथ भेल कारखाने में निविदा पर निविदा लेते जा रहे हैं । लेकिन उन मजदूरों का हक कम मिलेगा इसकी चिंता भेल के अफसरों को बिलकुल नहीं हैं जांच का विषय तो यह है कि यह सब जानते हुये कतिपय अफसर इस ठेकेदार को कहीं अपने लाभ-शुभ के चलते मदद तो नहीं कर रहे हैं ।
बड़ी बात तो यह है कि भेल का मानव संसाधन विभाग और भेल का विजिलेंस विभाग दोनों आंखें बंद किये हुये हैं। क्या इन्हें यह नहीं मालूम की उक्त ठेकेदार भगौड़ा घोषित है और सरकार के पीएफ और ईएसआईसी की वसूली के नोटिस भी जारी हैं ऐसे में यह ठेकेदार भेल कारखाने में खुले आम सुपरवाईजर व वर्कर का गेट पास बनाकर प्रवेश ही नहीं पा रहे हैं बल्कि हर ब्लॉक में घूम भी रहे हैं । ऐसे एक नहीं कई मामले हैं जिनमें ठेकेदार तो ब्लेक लिस्टेड हो गया है लेकिन दूसरे नाम से कंपनी बनाकर लाखों के वारे-न्यारे कर रहें है
