-सालों से नहीं हुआ लायसेंस का नवीनीकरण, किराये पर चल रहे हैं उद्योग
भोपाल
भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल)की बेशकीमती जमीन का नियम विरूद्ध उपयोग हो रहा है। मामला छह ब्लॉक हबीबगंज औद्योगिक क्षेत्र का है। सारे कानूनी पक्ष भेल प्रशासन के पक्ष में होने के बावजूद चंद उद्योगपतियों पर कार्यवाही करने से कतरा रहा है। लायसेंस फीस सालों से बकाया होने के बाद भी इन उद्योगपतियों पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। वर्तमान में जमीन की कीमत अरबों आंकी जा रही है।
जानकारी के मुताबिक पांच दशक पूर्व भेल प्रशासन ने अपने सहायक उद्योग चलाने के लिए छ: ब्लाक हबीबगंज में करीब 26 एकड़ जमीन उद्योगपतियों को मामूली लायसेंस फीस पर आवंटित की थी इनमें करीब 13 उद्योग स्थाािपत हुए थे। जिनमें से 11 चालू और 2 बंद हो चुके है। भेल प्रशासन मामूली लायसेंस फीस के बदले पानी, बिजली और अन्य सुविधाएं मुहैया करा रहा था। वर्ष 1995 में भेल प्रशासन ने बढ़ी हुई लायसेंस फीस की मांग की थी व लायसेंस नवीनीकरण कराने को कहा था लेकिन इन सब बातों को सहायक उद्योग ने दर किनार कर दिया।
मामला भेल के संपदा न्यायालय में चला जिसमें फैसला भेल प्रशासन के पक्ष में गया। यही नहीं भोपाल की प्रथम श्रेणी और जिला न्यायालय में भी भेल को ही जीत मिली। यहां तक कि इन उद्योगों को बेदखल करने की कार्यवाही भी चली लेकिन इसी बीच चंद उद्योगपतियों ने इस मामले में हाईकोर्ट से स्टे ले लिया। स्टे के चलते भेल प्रबंधन के हाथ बंध गये अब वह बिना कोर्ट के फैसले के न तो जमीन खाली करा सकता था न ही लायसेंस फीस की वसूली।
एक तरह से लायसेंस निरस्त होने के बाद यह जमीन पर काम करने वाले उद्योग स्वत: ही अतिक्रमण की दायरे में हैं। लंबा समय हाईकोर्ट लग जाने के कारण भेल प्रशासन न लायसेंस फीस वसूल पाया और न ही अतिक्रमण हटा पा रहा है। लेकिन यह जरूर है कि हाईकोर्ट से इस जमीन का फैसला यदि भेल के पक्ष में हुआ तो फैक्ट्री संचालकों को कई वर्षो का किराया बाजार दर पर देना पड़ेगा। गौरतलब है कि यह जमीन एमपी नगर, जोन-2 आईएसबीटी के सामने है।
सालों से नहीं हो पाई सुनवाई- मजेदार बात यह है कि यह मामला भले ही हाईकोर्ट में चल रहा हो लेकिन सालों गुजर जाने के बाद भी मामला कोर्ट की सूची में तो है लेकिन सुनवाई में नहीं आ पाया। इसके चलते भेल प्रशासन कार्यवाही नहीं कर पा रहा है।
कार्मिशियल उपयोग हो रहा है
खास बात यह है कि भेल प्रशासन ने यह जमीन औद्योगिक उपयोग के लिए लायसेंस फीस पर दी थी लेकिन कई एकड़ क्षेत्र में इस जमीन का कार्मिशियल उपयोग खुले आम हो रहा है। इस मामले में भेल प्रशासन कार्यवाही करने में सक्षम होते हुए भी कार्यवाही क्यों नहीं कर रहा है यह सोच का विषय है।
2012 से मामला कोर्ट में विचाराधीन
बड़ी बात यह है कि उद्योगपतियों ने कोर्ट से वर्ष 2012 में स्टे लिया था। मामला चलता रहा फिर कोर्ट ने इस मामले को निपटाने के लिए वर्ष 2016 का समय नियत किया था लेकिन उद्योगपतियों के आग्रह पर यह मामला आज तक नहीं निपट पाया। भेल प्रशासन इस बेशकीमती जमीन का सही उपयोग हो इस बात की कोशिश कर रहा है।
