भोपाल।
पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि गोवर्धन पूजा का दिन हम सबके जीवन में हमारी संस्कृति में बड़ा महत्व रखता है और हम भारतीय सनातन संस्कृति को मानने वाले लोग हैं, हमारी सनातन संस्कृति की आधारशिला गौ माता, गोवर्धन और गोविंद ही हैं। वे गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के रानी अवंती बाई ट्रांसपोर्ट नगर कोकता में स्थित महामृत्युंजय गौशाला में आयोजित गोवर्धन कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी।
श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा कि गोवर्धन की पूजा करने का संदेश भगवान कृष्ण ने हमको दिया है। आप सबको पता होगा कि किस प्रकार से बृजवासी भगवान इंद्र की पूजा करते थे, इंद्र को ही सब कुछ मानते थे। भगवान इंद्र को छप्पन भोग लगाते थे, भगवान इंद्र के लिए 56 भोग का कार्यक्रम था, तभी भगनाव श्री कृष्ण ने यशोदा मैया से पूछा कि मैया इतनी तैयारी काहे की चल रही है।
यशोदा मैया ने बोला सबसे बड़े देव इंद्रदेव हैं उनके लिए 56 भोग की व्यवस्था हो रही है, क्योंकि वह जल बरसते हैं। जब जल बरसता है, धरती पर आता है तो अनाज पौदा होता है। इन गायों को चारा मिलता है, जिसकी वजह से उनका पेट भरता है, तो भगवान कृष्ण ने कहा कि अगर इस वजह से भगवान इंद्र को पूछते हैं तो आज मैं बृजवासियों से कहूंगा कि हमको भगवान इंद्र को नहीं, बल्कि गोवर्धन को पूजना है। गोवर्धन पर्वत को पूजना है, क्योंकि असली में हमारे रक्षा करने वाला, हमारा पेट भरने वाला, हमारी गौ माता को चारा देने वाले पेड़ों के माध्यम से बारिश करने वाला तो गोवर्धन ही है। भगवान कृष्ण ने बृजवासियों को इकट्ठा करके अपनी बात उनके सामने रखी कि हमें इंद्र की पूजा नहीं करना, बल्कि हमें गोवर्धन बाबा की पूजा करना है और उसके बाद बाबा गोवर्धन की पूजा करने में लग गए।
भगवान इंद्र को जब यह पता चला कि ब्रज में उनकी पूजा बंद हो गई हैं। इसके बाद भगवान इंद्र ने भारी बारिश शुरू कर दी, जिसके बाद गोवर्धन पर्वत डूबने लगा। तब भगवान कृष्ण ने अपने दोनों भुजाओं से गोवर्धन पर्वत को ऊपर उठकर बृजवासियों की जान बचाने का काम किया था। पूरे बृजवासियों ने 7 दिन तक लगातार भगवान इंद्र के प्रकोप को सहा। दरअसल, भगवान कृष्ण दिन में 8 बार भोजन करते थे और जब उन्होंने 7 दिनों तक भोजन नहीं किया था तो सात का गुणा करने पर 56 होता है और इसलिए 56 भोग लगाया जाता है। हमारी संस्कृति का मूल आधार गंगा, गीता गौ माता, गोवर्धन और गोविंद हैं। इन पांचो के साथ हमारे जीवन का, हमारी संस्कृति का मूल मंत्र जुड़ा हुआ है इसलिए हम सब अपने-अपने जीवन में मां गंगा को महत्व देते हैं।
गौ माता को महत्व देते हैं, गीता को महत्व देते हैं, गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं। आज मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में गोवर्धन पूजा का आयोजन शासकीय स्तर पर किया जा रहा है। आप सभी को गोवर्धन पूजा की बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। इस दौरान, मध्य प्रदेश के सीधी-सिंगरौली जिले की विधानसभा से विधायक कुवर टेकाम, विधायक प्रतिनिधि अशोक dगुप्ता, पप्पू व्यास, कन्हैया विश्वकर्मा, प्रदीप लोधी, गणेशराम, पार्षद श्रीमती छाया ठाकुर, श्रीमती ममता मनोज विश्वकर्मा, शिरोमणि शर्मा और उर्मिला मौर्य मौजूद रहे।
