भोपाल।
राष्ट्र के गौरव के रूप में स्थापित बीएचईएल (भेल) एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सार्वजनिक क्षेत्र के मुख्य उपक्रम है। जो स्थापना वर्ष से लेकर आज तक निरन्तर भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड एक सार्वजनिक उद्यम व ऊर्जा के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं इंजीनियरिंग और विनिर्माण के क्षेत्र में कार्य करती है। भेल संस्थान में देश के विभिन्न राज्यों के हजारों कर्मचारी /अधिकारी पदस्थ हैं और सभी विभिन्न वर्गों से तालुकात रखते हैं, भेल प्रबंधन कर्मचारी अधिकारियों हेतु प्रभावी सेवा नियमों के साथ-साथ भारतीय संविधान के प्रावधानों के सेवा शर्तों एंव नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता रहा है। इन्ही उद्देश्यों के परिपालन हेतु विभिन्न वर्गो समुदाय के कर्मचारियों के वेलफेयर एसोसिएशन को प्रबंधन मान्यता देता है। फलस्वरूप भेल प्रबंधन की ओर से एसोसिएशन के अध्यक्ष व पदाधिकारियों को राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न आयोजित सेमिनारों में भी अपनी बात रखने और विभिन्न उच्च स्तरीय बैठको मे प्रतिनिधित्व का अवसर प्रदान किया जाता रहा है, जिससे नियमानुसार कार्य व समुदाय विशेष के कर्मचारी/अधिकारियों के हित सुरक्षा पर समीक्षा किया जा सके।
इसी के अंतर्गत संस्थान में कार्यरत अनुसूचित जनजाति कर्मचारियों/अधिकारियों के जनकल्याण के लिए कार्य करने वाली एसोसिएशन आदिम समुदाय एम्पलाईज वेल्फेयर एसोसिएशन भेल भोपाल के ट्राईबल वेलफेयर एसोसिएशन में एक गम्भीर मामला प्रकाश मे आया है। इस एसोसिएशन के पदाधिकारी अध्यक्ष एंव सचिव अवैध रूप से पद पर बने हैं और प्रबंधन को असत्य व झूठी जानकारी देकर भेल प्रबंधन की आंखों मे धूल झोंकने और समूचे भेल प्रबंधन व एसोसिएशन के प्रबंध कार्यकारिणी को भी अंधकार मे रखने के साथ साथ भेल में कार्यरत अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों/अधिकारियों को भी इससे अनभिज्ञ में रखा गया है।
जबकि एसोसिएशन के एफिलिएशन के लिए- नियमानुसार उस प्रतिष्ठान मे प्रचलित फर्मो एवं सोसाइटीज एक्ट के तहत एसोसिएशन का विधिवत पंजीयन कराकर भेल प्रबंधन से एफिलेशन कराना होता है, साथ ही नियमावली सहस्ताक्षर युक्त कार्यकारणी की सूची प्रस्तुत किये जाते हैं। इसी क्रम में आदिम समुदाय एम्पलाईज वेल्फेयर एसोसिएशन भेल भोपाल का पंजीकरण वर्ष सितंबर 2011 मे किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य समस्त अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों/अधिकारियों के जनकल्याण के लिए कार्य करना है, लेकिन कालांतर मे यह एसोसिएशन ऐसे साजिश का शिकार बन जायेगा, यह किसी की जानकारी मे नही था। वही पदाधिकारियों की निरंकुशता इतनी हावी हुई कि आदिम समुदाय एम्पलाइज वेल्फेयर एसोसिएशन में अवैध रूप से अध्यक्ष – जयपाल सिंह कड़ोपे एवं भीम धुर्वे अवैध सचिव बनकर सोसायटी अधिनियमों के विभिन्न प्रावधानों, नियमों का पालन करे बिना पद पर बने रहकर नियमों का खुलकर उलंघन किया गया। इन्होंने भेल प्रबंधन को असत्य व झूठी सूचना देकर, कूटरचित कृत्यों के साथ-साथ पद लोलुपता के कारण बिना जीवित पंजीयन के एसोसिएशन के अध्यक्ष-सचिव बने रहने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
आदिम समुदाय एम्पलाइज वेल्फेयर एसोसिएशन भेल भोपाल, जिसका कार्यक्षेत्र भेल भोपाल है, “फर्म्स एवं सोसाइटीज अधिनियम 1973 की धारा -27 अंतर्गत संस्था की वार्षिक आम सभा होने के दिनांक से 45 दिन के भीतर निर्धारित प्रारूप पर एसोसिएशन कार्यकारिणी समिति की सूची फाईल की जावेगी तथा धारा-28 के अंतर्गत संस्था की ऑडिटेड लेखा -जोखा फर्म एंड सोसायटी को भेजेगी।” यह स्पष्ट प्रावधानों के बाद भी विगत 2011 से आज तक कुल 13 वर्षों मे कोई भी जानकारी फर्म्स एवं सोसाइटीज पंजीकरण कार्यालय भोपाल नर्मदापुरम संभाग को नही भेजी गयी, जो पूर्णतः नियम विरूद्ध होकर कार्यवाही योग्य है। ट्रायबल वेल्फेयर एसोसियेशन नियमावली की कंडिका-13 के प्रावधाननुसार प्रबंध समिति का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। जबकि विगत 13 वर्षों से प्रबंध कार्यकारिणी जीवित पंजीयन के अभाव में अवैध बना हुआ है, और यही अवैध रूप से अध्यक्ष पद जयपाल सिंह कड़ोपे एंव सचिव भीम धुर्वे द्वारा पद धारण कर पद का दुरूपयोग करते हुए भेल प्रबंधन एंव भेल के अनुसूचित जनजाति कर्मचारियों एंव अधिकारियों को भ्रम मे रखा गया है। आदिम समुदाय एम्पलाइज वेल्फेयर एसोसिएशन भेल भोपाल के नियमावली-21 मे भी स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि अधिनियम की धारा-27 व 28 की जानकारी आमसभा के 45 दिवस के अंदर फर्म्स एवं सोसाइटीज पंजीयन कार्यालय मे जमा करना अनिवार्य है। फिर भी नियमावली का उल्लंघन करते हुए रिकार्ड जमा नही की गयी है, और विभिन्न राष्ट्रीय और प्रबंधन के बैठको में अध्यक्ष सचिव बनकर सम्मिलित होते रहे।
ऐसे मे सबसे चिंतनीय विषय है कि कैसे अवैध रूप से जयपाल सिंह कड़ोपे अध्यक्ष एंव भीम धुर्वे सचिव पद धारण कर, फर्म एंव सोसायटीज अधिनियमों का खुला उल्लंघन किया गया।
यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि जब कार्यकारिणी ही बिना जीवित पंजीयन के है तो अध्यक्ष, सचिव व कोषाध्यक्ष द्वारा बैंक खातों से वित्तीय लेन-देन कैसे वैद्य हो सकता है? नियमानुसार यह भी अनाधिकृत रूप से एसोसिएशन के खाते से लेन-देन को इंगित करता है। भेल भोपाल में कार्यरत अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों ने इसकी लिखित शिकायत भेल के अनुसूचित जनजाति लाईजिंग अधिकारी एंव भेल प्रबंधन को भी दे दिया है की इस तरह का कृत्य करने के बावजूद पद पर बने रहना अनुचित व आपराधिक कृत्य है। ऐसे संवेदनशील मामले मे भेल प्रबंधन को गुमराह कर अध्यक्ष-सचिव के पद का लाभ भेल प्रबंधन से लेने के मामलों पर अब देखना यह हे कि भेल प्रबंधन अवैध अध्यक्ष जयपाल सिंह कड़ोपे एंव अवैध सचिव-भीम धुर्वे के खिलाफ कार्यवाही में क्या रूख अपनाता है।
