— भोपाल के सबसे बड़े राधा कृष्ण के विग्रह दर्शन देंगे इस्कॉन मंदिर
भेल भोपाल।
इस्कॉन भोपाल में श्री भगवान के प्राण प्रतिष्ठा उत्सव के लिए 7 दिवसीय उत्सव का आयोजन किया गया है। इसकी अध्यक्षता परम पूज्य भक्ति विकास स्वामी महाराज तथा अन्य वरिष्ठ संन्यासी के मार्गदशन में हो रहा है। इस महोत्सव में भारत समेत, अमेरिका, रसिया तथा अन्य कई यूरोपीय देशों से भक्त सम्मिलित हुए हैं।
जयपुर से निर्मित होकर आए हैं श्री श्री गौर राधा बल्लभ
जयपुर स्तिथ विशेष मूर्तिकारों द्वारा श्री विग्रह का निर्माण हुआ है। भगवान कृष्ण काले संगमरमर से निर्मित हैं और श्रीमती राधारानी सफेद संगमरमर से निर्मित हैं। मुख्य विग्रह 4 फीट ऊंचे हैं और उत्सव विग्रह 1 फीट ऊंचे हैं। श्री विग्रह, एक अत्यंत सुंदर काष्ठ की वेदी जिसमे सोने की परत चढ़ी हुई है, उसमे विराजमान होंगे। श्री विग्रह के वस्त्र तथा अलंकार वृंदावन, मुंबई, जयपुर, दिल्ली स्तिथ कारीगरों द्वारा निर्माण किया गया है। सम्पूर्ण मंदिर को विविध सुंदर पुष्पों से श्रृंगार किया गया है। मंदिर के शिखर में अष्टधातु से निर्मित एक विषेश सुदर्शन चक्र स्तपित किया गया है।
प्राण पतिष्ठा यज्ञ
अधिवास समारोह द्वारा समस्त देवी देवताओं का आवाहन किया गया। श्री विग्रह स्थापन उत्सव, वैष्णव आचार्यों के उपस्थिति में, वैदिक नीति नियमों का पालन करते हुए किया जाएगा। संकल्प नेत्रों उनमिलन नामक एक विषेश यज्ञ होगा, जिसमे भक्त, श्री भगवान के विग्रह का आजीवन सेवा तथा सुरक्षा का संकल्प लेंगे। 14 नवंबर रात्रि को एक विशेष शयन आधीवस समारोह होगा, जिसमे मुख्य विग्रह को रात्रि में शयन कराया जायेगा 15 नवंबर को श्री भगवान का पंचगब्य से अभिषेक होगा। जिसमे दूध, दही, मधु, विविध फलरसों आदि होंगे। श्री भगवान पूर्ण श्रृंगार सहित दोपहर 3 बजे से जन साधारण को दर्शन देंगे।
विग्रह के माध्यम से सेवा स्वीकार करते हैं भगवान
वैदिक सभ्यता में श्री विग्रह के अर्चन का विशेष महत्व बताया गया है। मंदिर में प्रमाणिक परंपरा द्वारा स्थापित विग्रह भगवान से अभिन्न होते हैं। भगवान कृपा बस अपने भक्तों के सेवा स्वीकार करने हेतु विग्रह के रूप में दर्शन देते हैं। और भक्त भगवान का दर्शन और विग्रह के सेवा कर कृतार्थ होते हैं। जब श्रीविग्रह के सेवा प्रेम पूर्वक होती है, वे अपने दिव्य रूप से सभी का मन लोभित करते हैं, जिससे जन्म जन्मांतर से जीव के अंदर जो भौतिक भोग वृत्ति है, वो समाप्त हो जाता है, और भगवान की प्रेम भक्ति जागृत होती है।
तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम
कार्तिक पूर्णिमा (15 नवंबर) पर भगवान के प्रथम दर्शन होंगे। 16 नवंबर को एक मेगा यूथ फेस्टिवल का आयोजन है। जिसमे परम पूज्य भक्ति विकास स्वामी महाराज युवाओं को संबोधन देंगे। युवा अवस्था में आध्यात्मिकता और भगवद गीता का शिक्षा के ऊपर कथा होगी। 17 नवंबर रविवार को सार्वजनिक सत्संग कार्यक्रम रहेगा। इस महोत्सव में मंदिर में 30000 श्रद्धालुओं के हेतु प्रसाद की व्यवस्था की गई है।
