भोपाल। आधुनिक विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का बिगड़ना इंसानी भावनाओं को किस कदर चोट पहुंचाता है, इसका एक जीवंत और दर्दनाक उदाहरण अयोध्या बायपास पर देखने को मिला है। इलाके का वह सुंदर और महकता हुआ कोना, जिसे शहर के मशहूर पर्यावरण प्रेमी गुप्ता दंपत्ति ने पिछले 15 वर्षों की अथक मेहनत और लगन से सींचा था, आज विकास की दौड़ में सड़क और पुल निर्माण के कारण वीरान हो चुका है।
श्रीमती सीमा औरगुरुदास गुप्ता (गुप्ता दंपत्ति) ने आज से ठीक 15 वर्ष पहले बड़े प्रेम से इस छोटे से बगीचे की नींव रखी थी। उनके लिए यह केवल मिट्टी में उगे पेड़-पौधों का समूह नहीं, बल्कि उनके अपनों और प्रकृति प्रेम का एक जीवंत संसार था। समय के साथ यह बगीचा उनके परिवार का एक अभिन्न सदस्य बन चुका था, जो गर्मियों में पेड़ों की ठंडी छांव, बरसात में मिट्टी की सौंधी खुशबू और सर्दियों की धूप में खिले फूलों से मन को आनंदित करता था। इस बगीचे की सुंदरता और गुप्ता दंपत्ति के समर्पण की गूंज पूरे शहर में थी। इस अनोखी पहल के लिए उन्हें कई संस्थाओं से पुरस्कार और नगर निगम से विशेष सम्मान मिल चुका था। इसी पर्यावरण प्रेम के कारण नगर निगम ने उन्हें अपना ‘स्वच्छता एंबेसडर’ भी नियुक्त किया था। समय-समय पर शासन के मंत्रियों और कई विशिष्ट हस्तियों ने इस बगीचे का दौरा कर दंपत्ति का मनोबल बढ़ाया था।
शहर की तमाम जानी-मानी शख्सियतों ने इस बगीचे की मुक्त कंठ से सराहना की थी। प्रगति के लिए सड़क और पुल का निर्माण बेहद आवश्यक है, लेकिन जब विकास के नाम पर बुलडोजर ने इन हरे-भरे पेड़ों को गिराया और फूलों की क्यारियों को मिट्टी में मिला दिया, तो ऐसा लगा मानो वर्षों की मेहनत और भावनाओं को कुचल दिया गया हो। आज जब गुप्ता दंपत्ति इस उजड़े हुए स्थान को देखते हैं, तो उनके कदम रुक जाते हैं और आंखें उसी पुराने वैभव को खोजने लगती हैं। इस विनाश से सबसे ज्यादा पीड़ा उन बेजुबान चिड़ियों और गिलहरियों को देखकर हो रही है, जो प्रतिदिन यहां आती थीं। जिन शाखों पर बैठकर वे चहचहाती थीं, उनके कट जाने के बाद अब वे अपने आशियाने के लिए दर-दर भटक रही हैं।
