इंदौर। शहर के गुटकेश्वर मंदिर से सदर बाजार रोड तक सड़क चौड़ीकरण योजना के तहत सोमवार सुबह नगर निगम की रिमूवल टीम ने भारी पुलिस बल के साथ बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की। निगम द्वारा 9 पोकलेन मशीनों, 5 जेसीबी और 100 से अधिक कर्मियों के साथ किए गए इस ताबड़तोड़ एक्शन में अब तक 80 से ज्यादा रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों को मलबे में तब्दील किया जा चुका है।
एक तरफ जहां नगर निगम के अधिकारी अंकेश बिरथरिया इस कार्रवाई को शहर के विकास के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय निवासियों ने प्रशासन पर पक्षपात और संवेदनहीनता का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ितों का कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था, प्लॉट या फ्लैट का मुआवजा दिए बिना ही उनके चार-चार पीढ़ियों पुराने आशियानों को जमींदोज कर दिया गया, जिससे कड़कड़ाती धूप और मानसूनी आहट के बीच कई परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं।
इस प्रशासनिक बुलडोजर एक्शन से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र के बुजुर्ग, विधवाएं और निराश्रित लोग हुए हैं, जिनका इस दुनिया में इस आशियाने के अलावा कोई दूसरा ठिकाना नहीं था। गुटकेश्वर मंदिर रोड पर रहने वाली 65 वर्षीय बुजुर्ग विधवा कृष्णा पाठक अपने घर को ढहता देख बदहवास हो गईं। उन्होंने सिसकियों के बीच अपनी बेबसी बयां करते हुए कहा कि उनका जन्म इसी मकान में हुआ था और उनकी चार पीढ़ियां यहां रहीं, लेकिन प्रशासन ने बिना किसी पुनर्वास के सब कुछ छीन लिया। कमोबेश यही दर्द 47 वर्षीय निराश्रित राजकुमारी मिश्रा का भी दिखा, जिनका 15 फीट का मकान तोड़े जाने के बाद अब मात्र 6 फुट का किचन बचा है।
उन्होंने रोते हुए सवाल उठाया कि इस छोटी सी जगह में कोई कैसे सोएगा और कैसे खाएगा? प्रभावितों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन सरकार को पहले उनके सिर छुपाने की पक्की व्यवस्था करनी चाहिए थी। कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सड़क पहले से ही 120 फीट चौड़ी है, इसके बावजूद उनके वैध मकानों को निशान से ज्यादा तोड़ दिया गया, जबकि सामने मौजूद सरकारी जमीनों को छुआ तक नहीं गया।
