भोपाल
केंद्र सरकार की नई श्रम संहिताओं के विरोध में गुरुवार को राजधानी भोपाल में विभिन्न कर्मचारी संगठनों और ट्रेड यूनियनों ने धरना-प्रदर्शन किया। संयुक्त ट्रेड यूनियन मोर्चा के आह्वान पर बैंक, बीमा, बीएसएनएल, डाक विभाग, केंद्रीय कर्मचारी संगठनों और विभिन्न श्रमिक यूनियनों से जुड़े कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान पंजाब नेशनल बैंक के सामने कर्मचारियों ने धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नई श्रम संहिताएं कर्मचारियों के अधिकारों को कमजोर करती हैं और नौकरी की सुरक्षा पर खतरा पैदा करती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों से स्थायी रोजगार की व्यवस्था प्रभावित होगी और श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा कमजोर पड़ेगी। कई संगठनों की भागीदारी प्रदर्शन में आईएनटीयूसी, एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, सेवा सहित कई ट्रेड यूनियनों ने हिस्सा लिया। बैंक और बीमा क्षेत्र के कर्मचारियों की भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही। कुछ संगठनों ने प्रतीकात्मक रूप से काम बंद कर विरोध जताया, जबकि अन्य संगठनों ने धरना-प्रदर्शन के माध्यम से समर्थन दर्ज कराया। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार श्रमिक संगठनों से संवाद किए बिना कानून लागू कर रही है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और व्यापक किया जाएगा।
प्रमुख मांगें प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं चारों श्रम संहिताओं और उनसे जुड़े नियमों को निरस्त किया जाए। ड्राफ्ट सीड बिल वापस लिया जाए। बिजली संशोधन विधेयक रद्द किया जाए। SHANTI एक्ट (न्यूक्लियर एनर्जी कानून) वापस लिया जाए। मनरेगा को जारी रखा जाए और रोजगार सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
विकसित भारत—रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन अधिनियम 2025 को वापस लिया जाए। जनजीवन पर सीमित असर हालांकि राजधानी में प्रदर्शन हुए, लेकिन सामान्य जनजीवन पर इसका सीमित असर देखने को मिला। अधिकांश बाजार खुले रहे और बैंक शाखाएं भी सामान्य रूप से संचालित होती रहीं, जिससे आम नागरिकों को बड़ी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
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