भोपाल
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशील सोच और बुजुर्गों के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व का परिणाम ‘रामाश्रय वार्ड’ (जीरियाट्रिक वार्ड एवं क्लिनिक) आज प्रदेश के वृद्धजनों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत आधार बन चुके हैं। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में संचालित इन विशेष वार्डों के माध्यम से अब तक करीब 32 लाख बुजुर्ग लाभान्वित हो चुके हैं।
सम्मानजनक उपचार और सुगम प्रक्रिया रामाश्रय वार्डों ने बुजुर्गों को अस्पतालों की जटिल प्रक्रियाओं और लंबी कतारों से राहत दिलाई है। चिकित्सा मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के मार्गदर्शन में 14 मार्च 2024 से शुरू हुई इस पहल का मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को समर्पित और सुगम स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। अब वृद्धजनों को जांच के लिए भटकना नहीं पड़ता; बैड पर ही सैम्पल संग्रह और रिपोर्ट उपलब्ध कराई जा रही है।
सफलता के प्रमुख आंकड़े चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने इस नवाचार की सफलता के आंकड़े साझा किए:कुल पंजीकरण: लगभग 32 लाख बुजुर्ग।ओपीडी सेवाएं: करीब 30 लाख वृद्धजनों ने लाभ लिया।आईपीडी सेवाएं: लगभग 2 लाख बुजुर्ग भर्ती होकर उपचार पा चुके हैं।लैब टेस्ट: इन वार्डों के माध्यम से करीब 18 लाख टेस्ट किए गए। फिजियोथैरेपी: 44 हजार से अधिक रोगियों को यह सुविधा मिली।
आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं वार्ड बुजुर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रामाश्रय वार्डों में विशेष प्रबंध किए गए हैं:
आरक्षित बैड: प्रत्येक वार्ड में महिला एवं पुरुषों के लिए 10 फाउलर बैड आरक्षित हैं। सुरक्षा: आपात स्थिति के लिए नर्सिंग अलार्म सिस्टम और प्राइवेसी के लिए बैड के बीच परदे लगाए गए हैं। सहायक उपकरण: फिजियोथैरेपी के लिए शॉर्ट वेव डायाथर्मी और अल्ट्रासाउंड जैसी आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं।
विशेष शौचालय: महिला-पुरुषों के लिए अलग शौचालय जिनमें सुरक्षा हेतु ‘ग्रेब-बार’ लगाए गए हैं। समर्पित स्टाफ और जीरियाट्रिक क्लिनिक प्रत्येक वार्ड के सुचारू संचालन के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। आईपीडी में भर्ती मरीजों को विशेषज्ञ सेवाएं और नर्सिंग देखभाल वार्ड में ही मिलती है। इसके अलावा, ओपीडी के लिए अस्पतालों में विशेष ‘जीरियाट्रिक क्लिनिक’ बनाए गए हैं, जहां रजिस्ट्रेशन से लेकर दवा वितरण तक के लिए बुजुर्गों को अलग काउंटर की सुविधा दी गई है।
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