प्रगति विचार एवं साहित्य मंच, बुलंदशहर और चारु साहित्य प्रतिष्ठान, नेपाल के संयुक्त तत्वावधान में वाराणसी के दुर्गाकुंड स्थित श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय में ‘भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं सांस्कृतिक मैत्री सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया। इस गौरवशाली अवसर पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं बीएचईएल के सेवानिवृत्त अधिकारी सुरेश सोनपुरे ‘अजनबी’ को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए ‘अंतर्राष्ट्रीय काशी विश्वनाथ साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से सम्मानित किया गया। साहित्यिक आदान-प्रदान का संगम बर्दघाट प्रज्ञा प्रतिष्ठान, लुम्बिनी (नेपाल) के कुलपति डॉ. घनश्याम न्यौपाने की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में भारत और नेपाल के लगभग 100 रचनाकारों ने शिरकत की। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक डॉ. हरेंद्र हर्ष (बुलंदशहर) और डॉ. देवी पंथी (नेपाल) के मार्गदर्शन में चले इस सम्मेलन में गीत, गजल, कविता, लघु कथा और शोध पत्र वाचन के विभिन्न सत्र आयोजित हुए। ‘अजनबी’ की रचना ने मोहा मन भोपाल से प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए सुरेश सोनपुरे ‘अजनबी’ ने जब अपनी पंक्तियां पढ़ीं—”सीधे सादे भोले भाले हम सच्चे बन जाएं,
अभी-अभी एक सपना देखा हम बच्चे बन जाएं” तो सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित साहित्यकारों को भाव-विभोर कर दिया। सुरेश जी के साथ ही मध्य प्रदेश से डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव (भोपाल) और कमलेश शर्मा (सीहोर) को भी इसी प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों में उड़ीसा से प्रियम्बदा दास, जयपुर से राव शिवराज सिंह, भोपाल से डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव, रायबरेली से डॉ. शिवनाथ सिंह ‘शिव’ और काठमांडू से ममता मृदुल सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन ममता मृदुल एवं गोविंद पॉल (भिलाई) ने किया। अंत में डॉ. हरेंद्र हर्ष ने सभी आगंतुक साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया।
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