भोपाल
राजधानी भोपाल जल्द ही नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान रचने जा रहा है। एम्स और जेपी अस्पताल के बाद अब हमीदिया अस्पताल में भी अत्याधुनिक ‘ह्यूमन मिल्क बैंक’ शुरू होने जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने इसके शुभारंभ के लिए 17 मार्च 2026 की टेंटेटिव तारीख तय की है। इस सुविधा के शुरू होते ही भोपाल मध्य भारत का इकलौता और देश का ऐसा चुनिंदा शहर बन जाएगा, जहाँ तीन सरकारी संस्थानों में ह्यूमन मिल्क बैंक उपलब्ध होंगे। अंतिम चरण में तैयारियां, -30 डिग्री पर सुरक्षित रहेगा दूध हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन ने बताया कि मिल्क बैंक के लिए सिविल वर्क और मशीनों की स्थापना का काम अंतिम चरण में है। इस बैंक में माताओं द्वारा दान किए गए दूध को -30 डिग्री सेल्सियस के विशेष डीप फ्रीजर में संग्रहित किया जाएगा।
यहाँ आधुनिक मेकेनाइज्ड ब्रेस्ट पम्प, स्टरलाइजेशन सिस्टम और स्टोरेज यूनिट जैसी सुविधाएं होंगी। एक बार में यहाँ 50 से 60 लीटर दूध सुरक्षित रखा जा सकेगा। किन शिशुओं के लिए होगा जीवनदायी? यह सुविधा उन बच्चों के लिए ‘जीवनदान’ साबित होगी: प्री-मेच्योर बेबी: समय से पहले जन्मे बच्चे जिन्हें तत्काल पोषण की जरूरत होती है। SNCU में भर्ती बच्चे: विशेष देखभाल इकाई में भर्ती नवजात। बीमार माताएं: ऐसी माताएं जो गंभीर बीमारी या आईसीयू में होने के कारण स्तनपान नहीं करा पा रही हैं। 10 हजार डिलीवरी का कड़ा मानक नियमों के अनुसार, ह्यूमन मिल्क बैंक हर अस्पताल में नहीं खोला जा सकता। यह केवल उन्हीं अस्पतालों में संभव है जहाँ सालाना 10,000 से अधिक डिलीवरी होती हैं। हमीदिया अस्पताल (सुलतानियां अस्पताल के शिफ्ट होने के बाद) इस मानक को पूरा करता है। यहाँ के स्टाफ को इस विशेष तकनीक और काउंसलिंग के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है। नया कीर्तिमान: भोपाल बनेगा रोल मॉडल एनएचएम के तहत 2018 में शुरू हुई यह योजना अब अपने पूर्ण स्वरूप में आ रही है। हमीदिया अस्पताल में मिल्क बैंक के साथ ही आईवीएफ सेंटर शुरू करने की भी योजना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी क्षेत्र में मिल्क बैंकों के विस्तार से नवजात मृत्यु दर को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी।
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