नगर निगम ने एनएचएआई को दी सख्त चेतावनी
भोपाल। अयोध्या बायपास पर चल रहे 10-लेन सड़क निर्माण कार्य ने स्थानीय पांच लाख की आबादी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। निर्माण एजेंसी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की भारी लापरवाही के चलते आगामी मानसून में बायपास से सटी करीब 53 रहवासी कॉलोनियों के जलमग्न होने का खतरा पैदा हो गया है।
नगर निगम के अनुसार, बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद सड़क के दोनों तरफ बनाई जा रही नालियों का सतही लेवल (गहराई) ठीक नहीं किया गया है। जल निकासी की इस गंभीर समस्या को देखते हुए नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को एक सख्त पत्र जारी किया है। दरअसल, निगम ने ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए 16.88 करोड़ रुपए का एस्टीमेट भेजा था, जिसे एनएचएआई ने अब तक मंजूर नहीं किया है। यदि समय रहते इसमें सुधार नहीं हुआ, तो गोविंदपुरा, नरेला और हुजूर विधानसभा क्षेत्र की इन बस्तियों में बाढ़ जैसे हालात बन जाएंगे।
एक तरफ जहां जल निकासी का संकट खड़ा है, वहीं दूसरी तरफ सड़क चौड़ीकरण के लिए बिना किसी योजना के की जा रही मनमानी खुदाई से क्षेत्र की मुख्य पेयजल और सीवेज लाइनें आए दिन तोड़ी जा रही हैं। इस भीषण गर्मी में बार-बार पाइपलाइन फूटने से आधे से ज्यादा इलाके में जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो जा रही है, जिससे स्थानीय जनता में भारी आक्रोश पनप रहा है। नगर निगम ने अपने पत्र में साफ किया है कि 5 अप्रैल तक पाइपलाइनों को पहुंचाए गए नुकसान पर पेनाल्टी लगाने के बाद भी निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं आया है।
लिहाजा, अब दोबारा हुए नुकसान का आकलन कर एजेंसी से भारी जुर्माना वसूला जाएगा। इसके साथ ही, अमृत 2.0 प्रोजेक्ट के तहत नई सीवेज लाइन बिछाने के लिए एनएचएआई के पास भेजी गई अनुमति भी लंबे समय से लंबित पड़ी है।
