भोपाल
बागसेवनिया क्षेत्र में साढ़े सत्रह साल की नाबालिग से हुए गैंगरेप मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी विवेक सिंह ने जांच अधिकारियों को फटकार लगाई है, जिसके बाद पुलिस की सक्रियता बढ़ गई है। मामले की मुख्य आरोपी महिला का एक बिल्डर दोस्त (विदिशा निवासी) है, जिसे घटना के बाद सबसे पहले थाने लाया गया था। हालांकि, रसूखदारों के फोन आने के बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया, जिससे पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस ने अब तक निखिल सिंह कछवाहा (32) और अतुल मेडेकर (30) को गिरफ्तार किया है।
इनकी गिरफ्तारी पहले से पकड़ी गईं महिला आरोपियों—मोनिका इंदौरकर (26) और रेणुका बुनकर (24) की निशानदेही पर हुई है। पीड़िता (छिंदवाड़ा निवासी) को उसकी सहेली ने कॉलेज में एडमिशन दिलाने का झांसा देकर भोपाल बुलाया था। 18 मार्च को भोपाल पहुंचने पर उसे विद्या नगर ले जाया गया, जहाँ उसे नशीली शराब पिलाकर वारदात को अंजाम दिया गया। खबर के अनुसार, पुलिस ने शुरुआत में एफआईआर में आरोपियों को ‘अज्ञात’ बताया था, जबकि पुलिस के पास पहले से ही महत्वपूर्ण सुराग थे। अफसरों को जब इन कमियों का पता चला, तो जांच अधिकारियों को बदल दिया गया है। फिलहाल पुलिस ने बिल्डर की गिरफ्तारी और फरार दो अन्य आरोपियों को लेकर चुप्पी साध रखी है।
