भोपाल
हाईकमान के है चहेते-राजनीति और अनिश्चिता दोनों साथ-साथ चलने वाले प्रकल्प है,क्योंकि राजनीति में उत्तार चढ़ाव ही उसी प्रकार आते जाते रहते है जैसे प्रकृति में सूरज का उगना व उसका ढलना लेकिन राजनीति में कार्य करने वाले लोग नेता इस तिलीस्म से कम ही जानते हंै । मामला पश्चिमी मध्य-प्रदेश के कद्दावर कांग्रेस नेता उमंग सिघार का सामने आया है उन्हें कांग्रेस हाई कमान ने कर्नाटक चुनाव का पर्यवेक्षक बनाकर यह संदेश देने में हाई कमान ने कोई कोताही नहीं बरती कि उमंग सिंघार जैसे नेता अभी न सिर्फ उनके प्रिय है बल्की उनकी योगयता से परिचित भी है।
वैसे तो उमंग सिंघार कांग्रेस की राजनीति में बहुत तेजी से उभरने वाले नेताओं में से एक है जिन्होंने अपने 20 साल के राजनीति के जीवन में 5 चुनाव 2 लोक सभा व 3 विधानसभा लड़ कर अपनी योग्यता को साबित किया है, लेकिन कहते है कि सफल आदमी को रोकने के लिए हथ कन्डे भी कम नहीं होते है। लिहाजा पिछले समय में पत्नी द्वारा पुलिस में रिपोर्ट लिखवाकर बहुत बड़ा हंगामा खड़ा किया था और तब लोग यह मान बैठे थे कि अब उमंग सिंघार का जीवन राजनीति में अंधकार में पहुंच गया है। विरोधी समय समय पर हवा दे रहे थे, लेकिन हाई कमान द्वारा हाल ही में कर्नाटक चुनाव के लिए जारी पर्यवेक्षक कि सूची जारी कि उसमें उनका भविष्य समाहित कर इस आदिवासी नेता के प्रति विश्वास व्यक्त कर विरोधियों के मुंह सिल दिये।
श्री सिंघार उस समय में उलझन में आये थे तब कांग्रेस सुप्रिमों राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा लेकर इस इलाके से गुजरने वाले थे और विरोधियों ने उस समय हाई कमान की नजरों में एवं राहुल के नजरों में गिराने के लिए प्रयास कम नहीं किये थे। जाहिर है कि जो विरोधियों ने करतूते की थी और वे मान बैठे थे कि उमंग सिंघार घर बैठ जायेंगे लेकिन कर्नाटक कि पर्यवेक्षकों कि सूची यह संदेश देने में कामयाब रही कि उमंग सिंघार जहां आदिवासी लोगों के दिलों में स्थान बनाये हुए है वैसे ही हाई कमान का उन पर आर्शीवाद अभी भी कायम है।
उनके मामले में कांग्रेस की इस दीर्घ सोच को राजनीतिक पण्डित भी इसे गंभीर एवं बेहतर सोच बता रहे है, क्योंकि उनके प्रति हाई कमान को बेरूखी दिखाता तो जरूर आदिवासीयों में गलत संदेश जाता इसलिए कर्नाटक चुनाव में उंमग सिंघार को भेजकर एक तीर से तीन निशाने साधे है । एक तीर यह कि उमंग सिंघार हाई कमान के प्रिय है दूसरा यह कि जो राजनीति छवि बिगाडऩे वाला मामला हुआ था जो कि इनका यह मामला पारिवारिक था उसे गंभीरता से नहीं लिया था, तीसरा यह कि एक प्रदेश के नेताओं को खुला संदेश दिया है कि उमंग सिंघार कि जरूरत क्षेत्र को, प्रदेश को एवं हाई कमान तिनों को है।
