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कॉन्स्टेबल से बने ASI, माफिया को याद दिलाया छठी का दूध… तीन बेटियों को छोड़ ‘शहीद’ हुए महेंद्र बागरी की बहादुरी है मिसाल

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शहडोल:

एएसआई महेंद्र बागरी… नाम तो आपको याद ही होगा। मई 2024 में मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में फर्ज निभाते हुए शहीद हो गए थे। घटना के बाद मध्य प्रदेश में हड़कंप मच गया था। महेंद्र बागरी शहीद तब हुए थे, जब ड्यूटी के दौरान रेत से लदे ट्रैक्टर को उन्होंने रुकने का इशारा किया है। माफिया ने गाड़ी तो नहीं रोकी लेकिन एएसआई महेंद्र बागरी को रौंदते हुए आगे निकल गया। घटना के अब करीब एक साल होने वाले हैं लेकिन एमपी में खनन माफियाओं का आंतक कम नहीं हुआ है। हम आपको हर दिन एमपी में फर्ज निभाते शहीद हुए अफसरों की कहानी बताएंगे। इस कड़ी में आज आपको एमपी में शहीद हुए एएसआई महेंद्र बागरी के बारे में बताते हैं।

क्या हुआ था उस दिन
4 मई 2024 को शहडोल जिले ब्यौहारी थाने में पदस्थ एएसआई महेंद्र बागरी ने अन्य कॉन्स्टेबल के साथ ड्यूटी पर थे। वह फरार वारंटी को पकड़ने गए थे। तभी खढौली गांव के करीब उन्हें ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन होता दिखा। एएसआई और उनकी टीम उसे रुकने का इशारा किया। ड्राइवर राज रावत ने गाड़ी नहीं रोकी और एएसआई महेंद्र बागरी को कुचलकर मार दिया।

कॉन्स्टेबल से बने थे एएसआई
शहीद एएसआई महेंद्र बागरी बेहद कर्मठ थे। ड्यूटी को लेकर हमेशा सजग रहते थे। 2007 में महेंद्र बागरी की भर्ती शहडोल पुलिस में कॉन्स्टेबल के रूप में हुई थी। 15 सालों से अधिक की नौकरी के बाद वह एएसआई बने थे। शहडोल जिले के अलग-अलग थानों में ही उनकी तैनाती रही।

दो महीने पहले ही ब्यौहारी में हुई थी हत्या
दरअसल, महेंद्र बागरी की हत्या मई 2024 में हुई थी। मार्च 2024 यानी कि दो महीने पहले ही ब्यौहारी थाने में एएसआई बनकर आए थे। बताया जाता है कि थाने में आने के बाद ही एएसआई महेंद्र बागरी ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी थी। इसकी वजह से वह माफियाओं के निशाने पर रहते थे। लंबे समय तक एक ही जिले में तैनाती होने की वजह से महेंद्र बागरी भौगोलिक परिस्थितियों से अच्छी तरह वाकिफ थे।

सतना के रहने वाले थे महेंद्र बागरी
एएसआई महेंद्र बागरी मूल रूप से सतना जिले के रहने वाले थे। उनका पैतृक घर मसनहा में था। वहीं, जब घटना घटी थी तो पूरा गांव गमगीन हो गया था। सतना स्थित गांव में ही उनका अंतिम संस्कार हुआ था। उस समय तत्कालीन सतना एसपी ने उनके पार्थिव शरीर को कंधा दिया था।

महेंद्र बागरी की हैं तीन बेटियां
वहीं, एएसआई महेंद्र बागरी की तीन बेटियां हैं। तीनों उस समय शहडोल में ही पिता के साथ रहती थीं। बेटियों का नाम आयुषी, अनुश्री और शिवी है। इनसे कम उम्र में ही पिता का साथ छूट गया। शहीद एएसआई महेंद्र बागरी को मुखाग्नि उनके भतीजे ने दी थी। महेंद्र बागरी के पिता किसान हैं।

आरोपियों पर हुई थी बुलडोजर कार्रवाई
मामले में आरोपी ड्राइवर राज रावत को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही उसके घर पर बुलडोजर कार्रवाई हुई थी। सरकार ने एक करोड़ मुआवजे की घोषणा की थी। तत्कालीन टीआई को लाइन अटैच कर दिया था।

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