भोपाल। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ईरान युद्ध के दूरगामी असर अब मध्य प्रदेश की परिवहन व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगे हैं। युद्ध के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में आए भारी उछाल से डीजल, टायर और अन्य ऑटो पार्ट्स के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे बसों के संचालन की लागत तेजी से बढ़ गई है। इस आर्थिक संकट से जूझ रहे प्रदेश के बस संचालकों ने अब यात्री किराया बढ़ाने की मांग को लेकर सरकार के सामने गुहार लगाई है और इस संबंध में एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।
मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपे गए ज्ञापन में बस संचालकों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वे पिछले तीन सालों से लगातार किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन शासन स्तर पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। ज्ञापन के माध्यम से ध्यान आकर्षित कराया गया है कि प्रदेश में आखिरी बार किराए का निर्धारण 20 अप्रैल 2021 को हुआ था। उस समय भी बढ़ती लागत को देखते हुए 65% वृद्धि की अपेक्षा थी, लेकिन सरकार द्वारा केवल 25% की ही बढ़ोतरी की गई। इसके चलते बस संचालन का यह पूरा व्यवसाय लंबे समय से भारी आर्थिक दबाव में काम कर रहा है और अब मौजूदा दरों पर बसों का पहिया थामना उनकी मजबूरी बनता जा रहा है।
बस संचालकों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई, कोरोना काल के दौरान हुए भारी नुकसान के दुष्प्रभाव और नई सरकारी नीतियों ने इस व्यवसाय की स्थिति को और ज्यादा पेचीदा बना दिया है। पर्यावरण अनुकूल यूरो-6 (Euro-6) मानक की नई बसों की बाजार में ऊंची कीमत और उनके तकनीकी रखरखाव पर होने वाला भारी खर्च संचालकों के बजट से बाहर हो रहा है। इसके चलते पूरा व्यवसाय घाटे की तरफ ढकल रहा है। अकेले चालू मई महीने का हवाला देते हुए संचालकों ने बताया कि इस एक महीने में ही चार बार डीजल के दामों में बढ़ोतरी हो चुकी है। लगातार बढ़ती संचालन लागत के बावजूद किराया वर्षों से जस का तस स्थिर बना हुआ है, जिसने परिवहन व्यवसाय का आर्थिक संतुलन पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
