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Monday, April 27, 2026
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पंचायत से संसद तक का सफर, सागर को 44 साल बाद मिलीं महिला सांसद, जीत के सारे रिकॉर्ड तोड़े

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सागर

लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम के बाद सागर लोकसभा सीट एक बार फिर भाजपा के खाते में पहुंच गई है। वहीं, सागर को इतिहास में दूसरी बार महिला सांसद मिली है। बता दें कि नव निर्वाचित बीजेपी सांसद लता वानखेड़े ने कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रभूषण सिंह बुंदेला (गुड्डू राजा) को 4 लाख 69 हजार 83 वोट से शिकस्त दी है। सागर लोकसभा के इतिहास में यह अब तक की सबसे बड़ी जीत है।

लोकसभा चुनाव की मतगणना के बाद भाजपा प्रत्याशी लता वानखेड़े सांसद निर्वाचित हो गई हैं। मोदी लहर, राममंदिर मुद्दे के बाद भाजपा की जीत पहले से मानी जा रही थी। लेकिन सागर सीट पर इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज होगी इसका अंदाजा खुद प्रत्याशी वानखेड़े और भाजपा नेताओं को भी नहीं था। 8 विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक 90 हजार मतों से ज्यादा की लीड केवल सुरखी विधानसभा से मिली है।

लता वानखेड़े ने तोड़े जीत के रिकॉर्ड
सागर जिले की की 5 और विदिशा जिले की 3 विधानसभाओं में यह लीड सबसे अधिक है। वैसे हर विधानसभा से लता वानखेड़े को शानदार बढ़त पहले राउंड से ही मिली है। बता दें कि 2019 के चुनाव में भाजपा के सांसद राजबहादुर सिंह को करीब 3 लाख से अधिक वोटों से जीत मिली थी, उसे अब तक की सबसे बड़ी जीत बताया गया था। 2024 में लता ने उनके रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है।

कांग्रेस प्रत्याशी बुंदेला को महज सवा तीन लाख वोट मिले
निर्वाचन आयोग से जारी आंकड़ों के अनुसार बीजेपी प्रत्याशी को कुल मतदान में से 7 लाख 84 हजार 953 वोट मिले। वहीं, उनके निकटतम प्रतिद्वंदी और दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रभूषण सिंह बुंदेला को महज 3 लाख 15 हजार 870 वोट मिले। भाजपा के मुकाबले यह महज 40 फीसदी के आसपास है। सागर सीट से कुल 13 प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें से 11 तो जमानत भी नहीं बचा सके।

सरपंच से लेकर लोकसभा तक का सफर
नव निर्वाचित बीजेपी सांसद लता वानखेड़े ने 1995 से राजनीतिक सफर की शुरूआत की थी। वे मकरोनिया से पंच निर्वाचित हुई थीं। उसके बाद 2000 से 2015 तक तीन दफा वे मकरोनिया से सरपंच रही हैं। उन्होंने अपने जीवन में पंच-सरपंच से लोकसभा सदस्य तक का सफर तय कर लिया है। हालांकि पूर्व में वे भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष और उसके बाद मप्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष भी रहीं हैं। इसके अलावा त्रिस्तरीय पंचायती राज्य महासंघ की प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। पंचायत से लेकर संगठन का उन्हें खासा अनुभव है।

44 साल पहले सहोद्रा बाई राय बनी थीं सांसद, अब लता निर्वाचित
सागर लोकसभा सीट के इतिहास के पन्नों को पलटें तो 1971 में बीना की रहने वाली सहोद्राबाई राय कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुईं थी। उसके बाद दोबारा वे 1980 में दोबारा कांग्रेस के टिकट पर सांसद बनी थी। उसके बाद सागर सीट आरक्षित हो गई थी, बावजूद इसके इस सीट से किसी भी पार्टी ने फिर महिला को प्रत्याशी नहीं बनाया था। अब 44 साल बाद 2024 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में लता वानखड़े मैदान में उतरीं और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।

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