नारी शक्ति केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह धुरी है जिस पर पूरा संसार टिका है। इसी शक्ति को नमन करते हुए न्याशिस सामाजिक समिति ने बैतूल जिले के अभावग्रस्त ग्राम ख़मालपुर (पंचायत चिकली-आमठाना) में एक मिसाल पेश की है। पिछले 10 वर्षों से महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित यह टीम अब उन दुर्गम क्षेत्रों में पहुँच रही है जहाँ बुनियादी सुविधाओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की सबसे ज्यादा दरकार है।
नारी शक्ति का वंदन: कन्या पूजन से सामाजिक सशक्तिकरण की ओर
न्याशिस टीम ने चैत्र नवरात्रि के पवित्र समय को सेवा के अवसर के रूप में चुना। ग्राम ख़मालपुर के वनवासी क्षेत्र में कन्या पूजन और भोज का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में गाँव की नन्हीं कन्याओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। यह आयोजन केवल भोजन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य बालिकाओं के प्रति समाज के नजरिए को बदलना और उन्हें यह महसूस कराना था कि वे आने वाले कल की असली शक्ति हैं।
स्वास्थ्य का ‘डिजिटल’ सुरक्षा चक्र: तैयार किए गए हेल्थ रजिस्टर
कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि टीम ने केवल औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि सभी कन्याओं का ‘स्वास्थ्य संबंधित रजिस्टर’ तैयार किया। इसके जरिए अब साल भर उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जा सकेगी। विशेष रूप से वनवासी क्षेत्रों में पैर पसार रहे सिकल सेल एनीमिया, कुपोषण और अन्य गंभीर बीमारियों को लेकर टीम ने मोर्चा संभाला है। यह पहल सुनिश्चित करेगी कि आर्थिक तंगी या जानकारी के अभाव में किसी बच्ची का इलाज न रुके।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश: ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ को कहें ना!
संस्था के सचिव नवीन बोड़खे ने विशेष रूप से भोपाल से पहुँचकर ग्रामीणों और समाज के वरिष्ठ जनों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया। उन्होंने ‘प्लास्टिक मुक्त गाँव’ का विजन साझा करते हुए बताया कि कार्यक्रम में इस्तेमाल की गई सभी सामग्री सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त थी। यह समाज को एक बड़ा संदेश देता है कि हम अपनी परंपराओं का पालन बिना प्रकृति को नुकसान पहुँचाए भी कर सकते हैं।
एक दशक का अटूट विश्वास: अरुण यादव के नेतृत्व में सेवा भाव
बैतूल जिले के प्रभारी अरुण यादव ने बताया कि न्याशिस सामाजिक समिति पिछले एक दशक से महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर सक्रिय है। टीम का मानना है कि जब तक गाँव की महिला और बेटी स्वस्थ और शिक्षित नहीं होगी, तब तक समाज का विकास अधूरा है। यही कारण है कि टीम स्किल्स एनीमिया और शिक्षा जैसे बुनियादी विषयों पर निरंतर कार्य कर रही है ताकि अभावों के बीच भी प्रतिभाएं खिल सकें।
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जन-भागीदारी की ताकत: ग्रामीणों का बढ़ता सहयोग
किसी भी अभियान की सफलता जनता के साथ पर टिकी होती है। स्थानीय कार्यकर्ता प्रकाश उईके ने बताया कि संस्था द्वारा किए जा रहे इन प्रयासों में अब ग्रामीण भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। कन्या भोज हो या स्वास्थ्य शिविर, अब गाँव के लोग खुद आगे आकर टीम का सहयोग करते हैं। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि ईमानदारी से किए गए सामाजिक कार्यों की गूँज दूर तक जाती है और लोगों के दिलों में जगह बनाती है।
