भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की नई दिल्ली बेंच ने भोपाल के बहुप्रतीक्षित 16 किलोमीटर लंबे अयोध्या बायपास 10-लेन प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने पर्यावरणविद् नितिन सक्सेना की याचिका का निपटारा करते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी बेहद सख्त शर्तों के साथ काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकरण ने साफ किया कि यद्यपि बढ़ते ट्रैफिक दबाव और दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स को दूर करने के लिए यह 836.91 करोड़ रुपये की परियोजना राष्ट्रीय महत्व की है, लेकिन शहरी हरित क्षेत्र का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। इसलिए, प्रोजेक्ट को कड़े प्रतिपूरक उपायों और तय नियमों के दायरे में रहकर ही आगे बढ़ाया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट के तहत आसाराम चौराहे से रत्नागिरि तिराहे के बीच करीब 7,871 पुराने पेड़ों को काटा जाना था, जिसका पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों द्वारा सड़क पर उतरकर कड़ा विरोध किया गया था।
विरोध के बाद एनएचएआई ने ग्रीन बेल्ट वाले हिस्सों में सेंट्रल वर्ज की चौड़ाई को 5 मीटर से घटाकर 1.5 मीटर करने का निर्णय लिया है, जिससे 2,075 कीमती पेड़ों को कटने से बचा लिया गया है। वहीं याचिकाकर्ता के अनुसार, दिसंबर में हुई अंधाधुंध कटाई के बाद जो स्थगन आदेश जारी हुआ था, वह फिलहाल बरकरार रहेगा, जिससे पर्यावरण प्रेमियों को फौरी तौर पर बड़ी राहत मिली है। एनजीटी ने भविष्य में पर्यावरण की क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इसके तहत वन विभाग, नगर निगम, उद्यानिकी विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक संयुक्त तकनीकी समिति गठित की जाएगी, जो अगले 15 वर्षों तक प्रतिपूरक पौधारोपण कार्यों की कड़ी निगरानी करेगी। इसके अलावा, एनएचएआई को पिछले वर्षों में कैम्पा (CAMPA) मद में जमा की गई राशि और उसके उपयोग का पूरा विवरण सौंपना होगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी समय-समय पर जमीनी स्तर पर जाकर पौधों के जीवित रहने की स्थिति का परीक्षण करता रहेगा ताकि हरियाली के दावों की सत्यता बनी रहे।
