भोपाल। लिंक रोड नंबर-2 स्थित नगर निगम के नवनिर्मित मुख्यालय भवन में सुरक्षा इंतजामों की पोल खुल गई है। बुधवार शाम को निगम की एक महिला कर्मचारी ग्राउंड फ्लोर से तीसरी मंजिल पर जाने के लिए लिफ्ट में सवार हुईं, लेकिन तभी अचानक बिजली गुल हो गई। इस वजह से लिफ्ट दूसरी मंजिल पर बीच रास्ते में ही अटक गई। 73 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से बनी इस हाईटेक बिल्डिंग की लिफ्ट में ऑटो रेस्क्यू डिवाइस (ARD) या पावर बैकअप सिस्टम न होने के कारण स्थिति गंभीर हो गई और महिला कर्मचारी करीब 20 मिनट तक अंदर ही फंसी रही।
लिफ्ट अटकने की खबर फैलते ही मौके पर कर्मचारियों और आगंतुकों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस दौरान कुछ लोगों ने तकनीकी टीम के आने से पहले ही चाबी और पेचकस की मदद से लिफ्ट का दरवाजा खोलने का प्रयास शुरू कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचे नगर निगम की बिजली शाखा के कार्यपालन यंत्री आशीष श्रीवास्तव और तकनीकी टीम ने लोगों को गेट से छेड़छाड़ करने से रोका। टीम ने तुरंत लिफ्ट सिस्टम को रीसेट किया, जिसके बाद करीब 10 मिनट की मशक्कत के बाद महिला को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। बाहर आने के बाद महिला कर्मचारी बेहद डरी और घबराई हुई थीं।
अधिकारियों के अनुसार लिफ्ट में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी, बल्कि बिजली कटने से यह हादसा हुआ। हालांकि, इस घटना ने भवन के सुरक्षा प्रबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। निगम कर्मियों और आम नागरिकों का कहना है कि जिस मुख्यालय में रोजाना सैकड़ों लोग आते हैं, वहां लिफ्ट में ऑटो बैकअप जैसी बुनियादी सुविधा न होना बड़ी लापरवाही है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि लिफ्ट फंसने पर पेचकस या चाबी से गेट खोलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे लिफ्ट का ऑटो सेफ्टी सिस्टम बाधित होकर उसे वहीं जाम कर देता है।
