चुनाव आयोग ने गुरुवार (14 मार्च 2024) शाम अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए सबसे ज्यादा चंदा देने वाली कंपनियों की लिस्ट जारी कर दी। सबसे खास बात रही कि इस लिस्ट में देश के दो सबसे बड़ी कंपनियां, अडानी ग्रुप और रिलायंस इंडस्ट्रीज के नाम नहीं दिखे। बता दें कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के इलेक्टोरल बॉन्ड डेटा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग को हलफनामा दिया था। इस हलफनामे में इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाली कंपनियों और चंदा पाने वाली राजनीतिक पार्टियों के नाम शामिल हैं।
चुनाव आयोग द्वारा सार्वजनिक किए गए डेटा से इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाली कई बड़ी कंपनियों के नाम का खुलासा हुआ है। इनमें भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, लक्ष्मी निवास मित्तल, मेघा इंजीनियरिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड, वेदांता लिमिटेड, टॉरेंट पावर, अपोलो टायर्स आदि नाम शामिल हैं।आपको बताते हैं उन 10 कंपनियों के नाम जिन्होंने राजनीतिक पार्टियों को सबसे ज्यादा चंदा दिया।
1) Future Gaming and Hotel Services PR (1208 करोड़ रुपये)
2) Megha Engineering and Infrastructures Limited (821 करोड़ रुपये)
3) Qwik Supply Chain Private Limited (410 करोड़ रुपये)
4) Haldia Energy Limited (377 करोड़ रुपये)
5) Vedanta Limited (375.65 करोड़ रुपये)
6) Essel Mining and Industries Limited (224.5 करोड़ रुपये)
7) Western UP Power Transmission Company Limited (220 करोड़ रुपये)
8) Keventer Foodpark Infra Limited (195 करोड़ रुपये)
9) Madanlal Limited (185.5 करोड़ रुपये)
10) Bharti Airtel Limited (183 रुपये)
बता दें कि एसबीआई ने चुनाव आयोग को दो पार्ट में डेटा शेयर कर इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी का खुलासा किया है। पहले 337 पेज में इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाली कंपनियों और पर्चेज डेट (खरीदने की तारीख) जबकि दूसरे पार्ट के 426 पेजों में पॉलिटिकल पार्टियों के नाम, तारीख और रिडीम किए गए बॉन्ड का अमाउंट है।सबसे खास बात है इस सार्वजनिक किए गए डेटा से यह पता नहीं चला है कि किस कंपनी ने किस पार्टी को इलेक्टोरल बॉन्ड दिए।
इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए सबसे ज्यादा फंड पाने वाली पॉलिटिकल पार्टियों में बीजेपी, कांग्रेस, AIADMK, BRS, शिव सेना, टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस, DMK, JDS, NCP, तृणमूल कांग्रेस, जेडीयू, आरजेडी, आम आदमी पार्टी और एसपी शामिल हैं।
क्या होते हैं इलेक्टोरल बॉन्ड
इलेक्टोरल बॉन्ड को 2017 में भारत सरकार ने राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले डोनेशन में पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया था। इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को को 2017-18 में लागू किया गया लेकिन 15 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में इन बॉन्ड्स को असंवैधानिक करार दिया। स्टेट बैंक ऑफ इंडयिा ने 2018 से अब तक 30 हिस्सों में कुल 16,518 करोड़ रुपये के बॉन्ड बेचे।
बता दें कि इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वाले की पहचान गुप्त रहती है। मतलब कोई व्यक्ति या संस्था बैंक से बॉन्ड खरीदकर किसी भी पार्टी को गिफ्ट कर सकता है। और उसके बाद पार्टी को बैंक से इन बॉन्ड को एन्कैश कराना होता है। यानी व्यक्ति या संस्था की पहचान उजागर नहीं होती। इन इलेक्टोरल बॉन्ड की वैलिडिटी 15 दिन होती है और 15 दिन के अंदर एन्कैश ना कराने पर पैसा प्रधानमंत्री राहत कोष में डिपॉजिट हो जाता है।
