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1 करोड़ मैकेनिक, 75 लाख ड्राइवर… 2024 से पहले यूं ही पेचकस नहीं थाम रहे राहुल गांधी

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नई दिल्ली

जैसे-जैसे 2024 का आम चुनाव नजदीक आता जाएगा, चुनावी सरगर्मियां और नेताओं के दौरे बढ़ते जाएंगे। 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से मोदी-शाह की करिश्माई जोड़ी के सामने विपक्ष कभी मजबूत नहीं दिखा। हालांकि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की जमीन पर मौजूदगी जरूर बढ़ी है। वह कन्याकुमारी से कश्मीर पैदल चलते हैं। कभी दिल्ली बाजार में दिखते हैं तो कभी ट्रक से घूमकर ड्राइवरों की समस्याओं को समझते हैं। अमेरिका से लौटकर राहुल गांधी (53) दिल्ली के करोल बाग में बाइक मैकेनिक्स के साथ दिखे। वह एक बाइक की मरम्मत करने के लिए स्क्रू ड्राइवर लेकर काम करते भी दिखाई दे रहे हैं। जिस समय बीजेपी समान नागरिक संहिता की चर्चा कर रही है, पसमांदा मुसलमानों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती दिख रही है। आपके मन में सवाल पैदा हो सकता है कि राहुल गांधी ट्रक ड्राइवर और मैकेनिक से क्यों मिल रहे हैं?

लाखों-करोड़ों लोग हैं असंगठित क्षेत्र में
इसका जवाब जानने के लिए आपको समझना होगा कि अपने देश में असंगठित क्षेत्र कितना बड़ा है। जी हां, ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के महासचिव एन के गुप्ता बताते हैं कि देश में एक करोड़ से ज्यादा ट्रक हैं, जिसमें करीब 25 प्रतिशत ट्रक खड़े रहते हैं। उन्होंने बताया कि देश में करीब 70 से 75 लाख ट्रक ड्राइवर हैं। इसके अलावा असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मैकेनिकों की संख्या करीब एक करोड़ हैं। सच्चाई यह भी है कि संगठित क्षेत्र में महज 2 प्रतिशत लोगों को ही रोजगार मिला हुआ है। बाकी सभी असंगठित क्षेत्र में ही काम करते हैं।

अब आप समझ सकते हैं कि ड्राइवरों और मैकेनिकों से मिलकर राहुल असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंचना चाहते हैं। यह ऐसा तबका है जो रोज काम करता और खाता है। ऐसे कामगारों का दर्द महसूस करने की यह कांग्रेस नेता की एक पहल है। इसे कांग्रेस ‘भारत जोड़ो यात्रा जारी है’ कहकर प्रचारित कर रही है। इस लेबर फोर्स के साथ खास बात यह है कि यहां कोई जाति, धर्म का अंतर नहीं है। लेबर क्लास में हर क्षेत्र का श्रमिक आता है।

आपने पिछले दिनों देखा होगा जब राहुल ट्रक में यात्रा कर रहे थे तो उन्होंने ड्राइवरों की समस्याएं पूछी थीं। उन्होंने यह जानने की भी कोशिश की थी कि भारत में ट्रक ड्राइवर कितना कमा लेते हैं। जब वह अमेरिका में गए तो उन्होंने दोनों देशों के ट्रक ड्राइवरों के काम और पैसे का अंतर भी समझा। अमेरिका में ट्रक चलाने वाले ड्राइवर की कमाई जानकर वह चौंक गए थे। जी हां, अमेरिका में ट्रक चलाने वाले भारतीय ड्राइवर ने कहा था कि वह 8-10 लाख कमा लेते हैं। अमेरिका में तो ड्राइवरों का केबिन एसी होता है लेकिन भारत में 12-14 घंटे गाड़ी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए पिछले दिनों 2025 से एसी केबिन अनिवार्य करने की घोषणा हुई है।

कांग्रेस पार्टी ने राहुल की तस्वीरें शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘यही हाथ हिंदुस्तान बनाते हैं। इन कपड़ों पर लगी कालिख। हमारी खुद्दारी और शान है। ऐसे हाथों को हौसला देने का काम, एक जननायक ही करता है।’

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