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एक रोटी और एक रुपये में गली व टॉयलेट साफ कर रही 12 साल की मासूम, सिस्टम पर उठे सवाल

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अशोकनगर

देश में बालिकाओं की शिक्षा और बेहतर जिंदगी के लिए कई अभियान चल रहे हैं। मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में एक ऐसा मामला सामने यहां है जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो जाएंगी। गरीबी और मजबूरी की ऐसी तस्वीर जिसे देखने के बाद सरकारी योजनाओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल, 12 साल की एक मासूम बच्ची अपना और परिवार का पेट पालने के लिए 20 घरों की गली, नाली और टॉयलेट की सफाई कर रही है। मामला अशोकनगर जिले के बहादुरपुर कस्बे का है। 12 साल की बच्ची छह महीने से रोज अपनी आठ साल की बहन के साथ 20 घरों के सामने गली में झाडू लगाने का काम करती है। बदले में उसे मजदूरी के रूप में 1 रुपया या फिर रोटी मिलती है।

बच्ची नाली भी साफ करती है। वहीं कई घरों के टॉयलेट की सफाई कर रही है। इसके बदले में प्रत्येक घर से रोज उसे एक रुपए या फिर एक रोटी मिलती है। कभी-कभी बच्ची की बुआ भी सफाई करने आती है। बच्ची ने बताया कि कस्बे में सफाई व्यवस्था नहीं है।

1 रुपए की मजदूरी
इससे पहले पंचायत के पास केवल दो सफाई कर्मी थे। करीब 8 माह पहले संख्या बढ़ाकर 7 कर दी गई। पहले उन्हें 1200 महीने वेतन दिया जाता था लेकिन अब 2 हजार प्रति कर्मचारी वेतन कर दिया गया है। 2000 रुपए में परिवार का पालन पोषण सफाई कर्मचारी नहीं कर पाते हैं।

शौचालय साफ करने को मजबूर बालिका
जानकारी के मुताबिक पहले यह काम बालिका की दादी, मां और चाची करती थी। करीब 6 माह पहले उनके पिता ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। दादी की तबीयत खराब होने के कारण वह बिस्तर पर है। वहां ऐसी प्रथा है कि पति की मौत के बाद पत्नी सवा साल तक घर के बाहर नहीं जाती है। इसलिए मां के हिस्से का काम पढ़ने-लिखने की उम्र में मासूम बच्ची कर रही है।

दुकानों के सामने झाड़ू लगाने की ड्यूटी भाई की
12 साल की बालिका अपने माता-पिता की दूसरी संतान है। उसका 15 साल का एक बड़ा भाई भी है। बड़ा भाई दुकानों के सामने झाड़ू लगाता है। जिसे महीने में दुकान से 30 रुपए से लेकर 50 रुपए तक मिलते हैं। पहले यह काम उसका पिता करता था। बच्ची ने बताया कि उसे ये भी नहीं पता है कि उसकी सही उम्र क्या है। उसने बताया कि वो इस साल सातंवी क्लास में जाएगी। बच्ची का कहना है कि परिवार पालने के लिए कोई भी काम करने को तैयार है। उसके फैमिली मेंबर भी तो यही काम करते थे।

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