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अमेरिकी शराब पर 150% टैरिफ… ट्रंप प्रशासन ने भारत का नाम लेकर फिर साधा निशाना, मंशा क्‍या है?

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नई दिल्‍ली:

अमेरिका ने एक बार फिर भारत पर निशाना साधा है। व्हाइट हाउस ने मंगलवार को अमेरिका पर तमाम देशों की ओर से लगाए गए टैरिफ पर चर्चा की। भारत का जिक्र करते हुए बताया गया कि उसने अमेरिकी शराब पर 150% और कृषि उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ‘जैसे को तैसा’ के पक्षधर हैं और निष्पक्ष व्यापार चाहते हैं। उन्होंने कनाडा पर आरोप लगाया कि वह दशकों से अमेरिका और मेहनती अमेरिकियों का शोषण कर रहा है।

लेविट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘राष्ट्रपति इस तथ्य पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं कि कनाडा दशकों से अमेरिका और मेहनती अमेरिकियों का शोषण कर रहा है। अगर आप कनाडा की ओर से अमेरिकी लोगों और श्रमिकों पर लगाए गए टैरिफ की दरों को देखें तो यह बेहद ज्‍यादा है।’ यह ट्रंप की कनाडा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मार्क कार्नी के साथ बातचीत की योजना पर पूछे गए सवालों के जवाब में कहा गया था। इसके बाद उन्होंने भारत और जापान की ओर से विभिन्न अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति अमेरिकी व्यापार और श्रमिकों के हितों को प्राथमिकता देते हैं।

भारत का ऐसे आया ज‍िक्र
लेविट ने कुछ उदाहरण देते हुए कहा, ‘वास्तव में मेरे पास एक चार्ट है जो न केवल कनाडा, बल्कि सभी जगह टैरिफ की दरों को दर्शाता है। अगर आप कनाडा को देखें तो अमेरिकी पनीर और मक्खन पर लगभग 300% टैरिफ है। भारत को देखिए अमेरिकी शराब पर 150% टैरिफ। क्या आपको लगता है कि इससे केंटकी बूर्बन को भारत में निर्यात करने में मदद मिल रही है? मुझे नहीं लगता। भारत से कृषि उत्पादों पर 100% टैरिफ।’

फॉक्स न्यूज के अनुसार, रविवार को ट्रंप ने मेक्सिको और कनाडा पर टैरिफ बढ़ाने का संकेत दिया था। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ऐतिहासिक रूप से अमेरिका का फायदा उठाया है। व्यापार जगत के लीडर्स की ओर से टैरिफ की अनिश्चितता के बारे में चिंताओं को दूर करते हुए ट्रंप ने भविष्य में ग्रोथ की संभावना का सुझाव दिया। उन्होंने वर्षों से चली आ रही अनुचित अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रथाओं से उबरने की जरूरत पर बल दिया।

ट्रंप ने सीमा नियंत्रण और अमेरिका में फेंटेनाइल की तस्करी की चिंताओं का हवाला देते हुए मेक्सिको, कनाडा और चीन पर टैरिफ लगाए हैं। 7 मार्च को ट्रंप ने 2 अप्रैल के कार्यान्वयन से पहले मेक्सिको और कनाडा पर कुछ उत्पादों के टैरिफ को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया था। यह मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम के साथ बातचीत के बाद हुआ। हालांकि, उन्होंने कनाडा की टैरिफ नीतियों की आलोचना की।

हाल ही में, ट्रंप ने भारत के टैरिफ का जिक्र करते हुए कहा कि ऊंची टैरिफ दरों के कारण भारत के साथ व्यापार करना बेहद मुश्किल है। उन्होंने कहा कि भारत अपने टैरिफ को कम करने के लिए सहमत हो गया है और इसका श्रेय उनकी व्यापार प्रथाओं की बढ़ती जांच को दिया है।

क्‍या है अमे‍र‍िका की मंशा?
यह पूरी घटना अमेरिका और अन्य देशों, खासकर कनाडा और भारत के बीच चल रहे व्यापार तनाव को उजागर करती है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि मौजूदा व्यापार व्यवस्था अमेरिका के लिए अनुचित है। वह पारस्परिकता पर आधारित नई व्यवस्था चाहते हैं। ट्रंप मानते हैं कि दूसरे देश अमेरिकी उत्पादों पर बहुत ज्‍यादा टैरिफ लगाते हैं, जबकि अमेरिका उनके उत्पादों पर कम टैरिफ लगाता है। इसलिए वह इन टैरिफ को बढ़ाने की धमकी दे रहे हैं ताकि दूसरे देशों पर दबाव बनाया जा सके। उन्हें टैरिफ कम करने के लिए मजबूर किया जा सके। हालांकि, यह रवैया अन्य देशों के साथ व्यापार युद्ध छेड़ सकता है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।

ट्रंप का मानना है कि अमेरिका को दशकों से अनुचित व्यापार प्रथाओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका तर्क है कि दूसरे देश अमेरिकी बाजार का फायदा उठा रहे हैं और अमेरिकी कंपनियों और श्रमिकों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। वह इस स्थिति को बदलना चाहते हैं। सुनिश्चित करना चाहते हैं कि अमेरिकी कंपनियों को वैश्विक बाजार में समान अवसर मिले।

हालांकि, ट्रंप की टैरिफ नीति की कई अर्थशास्त्रियों और व्यापार विशेषज्ञों ने आलोचना की है। उनका तर्क है कि टैरिफ बढ़ाने से व्यापार युद्ध शुरू हो सकते हैं। इससे उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ सकती हैं। आर्थिक विकास धीमा हो सकता है। इसके अलावा, टैरिफ बढ़ाने से अमेरिकी कंपनियों के लिए दूसरे देशों में निर्यात करना मुश्किल हो सकता है। इससे उन्हें नुकसान होने की आशंका है।

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