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Sunday, May 10, 2026
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शख्स ने पर्यटकों को लगाई लताड़, कहा – गर्मियों में ना आएं हिमाचल-उत्तराखंड, गंगा को नहीं है किसी बोतल की जरूरत

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ऋषिकेश में आप घूमने-फिरने एडवेंचर का मजा लेने के लिए जाते हैं, लेकिन अगर वहां कूड़ा-कचरा ही फैलाना है तो आप आराम से घर पर ही बैठे, ऐसा कहना है सोशल मिडिया पर पोस्ट डालने वाले एक शख्स का जो कूड़े की तस्वीर देख लोगों को लताड़ लगा रहे हैं।

घूमने-फिरने जाते हैं, तो वहां की साफ-सफाई की जिम्मेदारी केवल स्थानीय लोगों की ही नहीं होती, अगर उन्होंने किसी शहर को हमारे लिए साफ किया है तो जिम्मेदारी हमारी भी बनती है कि वहां जाने के बाद उस जगह को स्वच्छ रखें। लेकिन कई लोगों की लापरवाही टूरिस्ट प्लेस को कचरा बना देती है। जहां लोग कूड़ा फैलाने वालों के खिलाफ वीडियो बनाते हैं, वहीं एक शख्स ने ऋषिकेश में कूड़े के ढेर को देख अपना गुस्सा जाहिर किया।

जैसा कि हम सभी जानते हैं, आजकल कॉर्पोरेट ऑफसाइट ट्रिप्स भी शुरू हो गए हैं, ऐसे में कुछ लोग अपनी जिम्मेदारी को नजरअंदाज कर इधर-उधर कचरा फैला रहे हैं। यहां आने वाले पर्यटक गंगा नदी के किनारे कचरा फैला रहे हैं और शराब की बोतलें डाल रहे हैं। जाहिर सी बात है ये सब देख हर किसी का गुस्सा निकलेगा। चलिए जानते हैं आखिर सोशल मिडिया पर क्या पोस्ट किया गया।

सोशल मिडिया पर डाला गया पोस्ट
22 मार्च को जब लोग लिंक्डइन पर स्क्रॉल कर रहे थे, तो उन्हें एक सीधा और झकझोर देने वाला संदेश दिखा – “कृपया इस गर्मी में हिमाचल और उत्तराखंड मत आइए। कृपया!! हिमालय को आपकी जरूरत नहीं है। समुद्र तटों को आपकी जरूरत नहीं है। मां गंगा को शराब की बोतलों की जरूरत नहीं है।”

तस्वीर ने किया हैरान
गुरुग्राम, हरियाणा के सिद्धार्थ डे ने यह भावुक अपील एक चौंकाने वाली तस्वीर के साथ पोस्ट की। ये तस्वीर ऋषिकेश में गंगा किनारे की है, जहां काले कचरे के बैग और करीब दर्जनभर शराब की खाली बोतलें पड़ी हैं, और सामने त्रयंबकेश्वर मंदिर दिखाई दे रहा है।

पढ़े-लिखे लोगों को लगाई लताड़
​उन्होंने लिखा – “और ये नदी मां गंगा है। वह नदी जो हर दिन 40 करोड़ भारतीयों की प्यास बुझाती है… और हर दिन यहां ऋषिकेश के कुछ लोगों को टनों कचरा और शराब की बोतलें साफ करनी पड़ती हैं।” “ऋषिकेश में कैंपिंग और राफ्टिंग के बाद मां गंगा में शराब की बोतलें फेंकना बहुत आम बात हो गई है। इनमें से ज्यादातर लोग पढ़े-लिखे होते हैं, बड़ी-बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों में काम करते हैं। वे यहां कॉरपोरेट ऑफसाइट के नाम पर आते हैं और गंगा में कचरा डालकर चले जाते हैं।”​

सरकार की कोशिशें हैं नाकाम
सिद्धार्थ डे ने लोगों से गुज़ारिश की कि अगर वे पर्यावरण का सम्मान नहीं कर सकते, तो बेहतर होगा कि वे ऋषिकेश न आएं। बल्कि, वे कहीं भी न जाएं और घर पर ही बैठें। ऑनलाइन लोगों ने इस नजारे को दिल तोड़ने वाला बताया। एक शख्स ने कहा कि उनके अनुभव में “सबसे ज्यादा अनपढ़” लोग वही से निकले जो बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम करते हैं। बता दें, सरकार और स्थानीय लोगों की तमाम कोशिशों के बावजूद, गंगा अब भी दुनिया की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक बनी हुई है।

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