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एडवोकेट ने मणिपुर की महिलाओं के मामले की तुलना प. बंगाल से की तो चढ़ा CJI का पारा, जानिए गुस्से में क्या बोले चंद्रचूड़

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नई दिल्ली

मणिपुर मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ फिर से फायर थे। महिला एडवोकेट ने पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ की घटनाओं का जिक्र कर कहा कि जैसे अदालत मणिपुर में महिलाओं की नग्न परेड की घटना को संजीदगी से ले रही है वैसे ही दूसरे सूबों में हुई वारदातों का संज्ञान भी लिया जाना चाहिए। सीजेआई का पारा वकील की बात सुनकर चढ़ गया। उनका कहना था कि ये मामला बिलकुल अलग है। हम पश्चिम बंगाल या किसी दूसरे सूबे में हुई वारदात से इसको नहीं जोड़ सकते। मणिपुर में जो कुछ हुआ वो मानवता को शर्मसार करने वाला है।

मणिपुर मामले पर हो रही सुप्रीम सुनवाई के दौरान एडवोकेट बंसुरी स्वराज ने Intervention Application के जरिये ये मांग उठाई थी। सीजेआई का कहना था कि मणिपुर का मामला दूसरे सूबों में हुई वारदातों से बिलकुल अलग है। हम इस आधार पर मणिपुर की घटना को सही नहीं ठहरा सकते कि दूसरे सूबों में भी ऐसी ही वारदातें हुई हैं। सीजेआई का कहना था कि हमारा दायित्व है कि उन दोनों महिलाओं को न्याय मिलना चाहिए।

केंद्र के साथ मणिपुर की सरकार को सुप्रीम फटकार
सीजेआई ने दोनों सरकारों को फटकार लगाकर कहा कि हमें सूचित करें कि आप पीड़ितों को किस तरह की कानूनी सहायता मुहैया करा रहे हैं। उनका सवाल था कि वह अन्य जानकारियों के साथ यह भी जानना चाहते हैं कि अब तक कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया। हम राज्य के प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास पैकेज के बारे में भी जानना चाहेंगे। सीजेआई मणिपुर की दोनों सरकारों के रवैये से खासे नाराज दिखे।

चंद्रचूड़ ने कहा कि सॉलिसीटर जनरल बताए कि मणिपुर में कितने जीरो एफआईआर दर्ज किए गए हैं। समय हमारे हाथ से निकला जा रहा है। राज्य को मरहम लगाने वाले कदम की जरूरत है। सीजेआई ने कहा कि मणिपुर के वीडियो में दिखाई गई महिलाओं को पुलिस ने दंगाई भीड़ को सौंप दिया, यह भयावह है। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराध को भयावह करार देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट नहीं चाहता की मणिपुर पुलिस मामले को देखे।

मणिपुर पुलिस पर खासे नाराज थे चंद्रचूड़
सीजेआई का सवाल था कि जब महिलाओं के खिलाफ हैवानियत की जा रही थी, पुलिस क्या कर रही थी? वीडियो मामले का केस 24 जून को मजिस्ट्रेट कोर्ट में क्यों भेज दिया गया। घटना चार मई को सामने आ गई थी तो पुलिस को FIR दर्ज करने में 14 दिन क्यों लगे? सीजेआई ने मामले की जांच के लिए रिटायर महिला जजों की अगुवाई में एक कमेटी बनाने की बात भी कही। हालांकि इसे लेकर कोई आदेश जारी नहीं किया जा सका।

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