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कंप्यूटर जैसा दिमाग चला रहा आफताब, क्या नार्को टेस्ट के लिए जवाबों का किया था रिहर्सल?

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नई दिल्ली

अपनी लिव-इन पार्टनर श्रद्धा वालकर की हत्या का आरोपी आफताब पूनावाला कंप्यूटर की तरह दिमाग चला रहा है। माना जा रहा है कि उसने नार्को टेस्ट के दौरान डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों को गुमराह करने की कोशिश की। बेहोशी की हालत में उसने पहले से रिहर्सल किए जवाब दिए। दरअसल, सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया है कि आफताब ने तिहाड़ जेल वापस ले जाते समय एक पुलिसकर्मी को बताया था कि वह पहले काफी बदतर हालात में रह चुका है। उसका इशारा ड्रग्स की तरफ था। आफताब ने पुलिस को बताया कि वह दिल्ली में नया था और उसे ठीक से याद नहीं है कि उसने कहां श्रद्धा के शव के टुकड़े फेंके थे।

श्रद्धा का सिर कहां, फोन कहां
उसने श्रद्धा का सिर महरौली के जंगली इलाकों में और फोन समुद्र में फेंकने की बात कही है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट ने बताया है कि शुक्रवार को तिहाड़ जेल में आफताब का नार्को टेस्ट किया गया। उसने अपनी पॉलीग्राफ-नार्को जांच और पुलिस पूछताछ के दौरान एकसमान जवाब दिए हैं। ‘नार्को’ जांच में सोडियम पेंटोथल, स्कोपोलामाइन और सोडियम एमिटल जैसी दवाएं दी जाती हैं, इससे व्यक्ति को एनेस्थीसिया का असर होने लगता है।

सम्मोहन (हिप्नोटिक) स्टेज में व्यक्ति पूरी तरह से होश-हवास में नहीं रहता है। ऐसे में उसके नई जानकारियां देने की संभावना रहती है, जो वह होश में रहते हुए नहीं बता रहा था। जांच एजेंसियां इसका इस्तेमाल तब करती हैं, जब दूसरे सबूतों से तस्वीर साफ न हो पा रही हो। पहले दिल्ली पुलिस ने कहा था कि उसने पूनावाला की नार्को जांच की मांग की क्योंकि पूछताछ के दौरान उसके जवाब भ्रामक रहे।

केस में आएगा कोई नया ऐंगल?
पुलिस सूत्रों ने बताया है कि नार्को जांच के दौरान पूनावाला ने बताया कि उसने श्रद्धा के शव के टुकड़े करने के लिए एक छुरे का भी इस्तेमाल किया था। उसने आरी को गुड़गांव में अपने दफ्तर के पास झाड़ियों में फेंक दिया था। एक सूत्र ने कहा, ‘उसने पूछताछ के दौरान पुलिस के सवालों के एक जैसे जवाब दिए। पॉलीग्राफ और नार्को जांच के दौरान उसके बयान में कोई बदलाव नहीं आया।’ ऐसे में साफ है कि जांच में किसी तरह का नया मोड़ आने की संभावना नहीं है। उसने अपनी लिव-इन-पार्टनर की हत्या की बात स्वीकार की है और यह भी कबूल किया कि दिल्ली के जंगल वाले इलाकों में कई जगहों पर शव के टुकड़े फेंके थे। वैसे, पुलिस को अभी तक श्रद्धा का सिर नहीं मिला है।

आफताब के खिलाफ सबूत
शुक्रवार को पूनावाला से ‘नार्को’ जांच के बाद दो घंटे तक पूछताछ हुई। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री की चार सदस्यीय टीम और जांच अधिकारी पूनावाला से पूछताछ के लिए तिहाड़ जेल पहुंचे थे। वालकर की DNA रिपोर्ट अगले सप्ताह तक आने की उम्मीद है। अब तक 13 से अधिक हड्डियां मिल चुकी हैं। डॉक्टर श्रद्धा की मौत की पुष्टि के लिए केवल विशिष्ट हड्डियों की मात्रा और गुणवत्ता का मिलान करेंगे। जांच अधिकारियों के पास यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि आफताब ने अपनी लिव-इन पार्टनर की हत्या की। वे डिजिटल फुटप्रिंट्स और सबूतों का भी इंतजार कर रहे हैं।

महत्वपूर्ण यह भी है कि नार्को टेस्ट के दौरान दिए गए बयान अदालत में प्रारंभिक सबूत के तौर पर स्वीकार्य नहीं होते हैं। केवल कुछ परिस्थितियों में ही ये स्वीकार्य हैं, जब पीठ को मामले के तथ्य और प्रकृति इसके अनुरूप लगे। पूनावाला को 12 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था।

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