18.7 C
London
Saturday, May 9, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयअमेरिकी प्रेसिडेंट ने भारत को कह दिया जेनोफोबिक, क्या है इस शब्द...

अमेरिकी प्रेसिडेंट ने भारत को कह दिया जेनोफोबिक, क्या है इस शब्द के मायने, क्यों हो रहा विवाद?

Published on

नई दिल्ली,

US के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने फंड इकट्ठा करने वाले एक इवेंट के दौरान विवादित बयान दे दिया. बाइडेन ने कहा कि भारत समेत चीन, जापान और रूस जेनोफोबिक हैं, और इसी वजह से उनकी आर्थिक तरक्की नहीं हो पा रही. आरोप में घिरा हर देश अपने-अपने ढंग से राष्ट्रपति के बयान पर एतराज जता रहा है. इस बीच समझिए, क्या है जेनोफोबिया. क्या वाकई भारत समेत कटघरे में रखे गए देशों में दूसरे मुल्क से आए लोगों को शरण नहीं दी जा रही.

क्या है जेनोफोबिया शब्द का अर्थ
जेनोज मतलब अजनबी, और फोबोज यानी डर. जेनोफोबिया को बाहरी लोगों, या अजनबियों से डर मान सकते हैं. ये विदेशियों के लिए भी हो सकता है, या उनकी किसी आदत के लिए भी. ये डर केवल डरने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि नफरत में बदल जाता है. जेनोफोबिक लोग दूसरों या अपने से अलग लोगों की हर बात को नफरत से देखते हैं.

जो बाइडेन ने अपने देश की तारीफ करते हुए कहा था कि उनकी इकनॉमी मजबूत है क्योंकि वे इमिग्रेंट्स का स्वागत करते रहे. वहीं भारत, चीन और जापान अपने डर की वजह से इकनॉमिक चैलेंज झेल रहे हैं. वे अप्रवासियों को नहीं चाहते हैं.

अमेरिका में सबसे ज्यादा इमिग्रेंट्स
ये बात सही है कि अमेरिका में बाहरी लोगों की संख्या काफी ज्यादा रही. साल 2019 में इस देश में इमिग्रेंट्स की संख्या 5 करोड़ से ज्यादा थी. ये तब दुनिया में कुल आप्रवासियों का 19 प्रतिशत, जबकि अमेरिकी जनसंख्या का 14 प्रतिशत था. इसके बाद बाहरी लोगों को सबसे ज्यादा पनाह देने वालों में जर्मनी और सऊदी अरब हैं.

भारत में क्या हैं हाल
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने एक ग्लोबल रिपोर्ट जारी की, जिसमें भारत को शरणार्थियों की टॉप पसंद बताया गया. हमारा देश दक्षिण-पूर्वी एशिया के उन तीन देशों में सबसे ऊपर है, जिसने लगातार सबसे ज्यादा शरणार्थियों को शरण दी. यहां तक कि प्रवासियों की संख्या भी यहां कम नहीं. डब्ल्यूएचओ की मानें तो दुनिया में हर आठ में से एक व्यक्ति प्रवासी है. स्टेटिस्टिका के अनुसार, साल 2020 में भारत में साढ़े 4 मिलियन लोग बाहर से रहने आए.

असल संख्या की सीमित जानकारी
रिफ्यूजियों की असल संख्या में काफी घालमेल हो सकता है. यूनाइटेड नेशन्स हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजीस (यूएनएचसीआर) नब्बे के दशक से लगातार इसपर नजर रख रहा है कि किस देश में कितने शरणार्थी हैं और किस हाल में रह रहे हैं. ये आमतौर पर एजेंसी के साथ रजिस्टर्ड होते हैं. यही डेटा यूएनएचसीआर के पास होता है. लेकिन शरणार्थियों की काफी आबादी बिना पंजीकरण के भी रह रही है, इनकी कोई पहचान नहीं है.

भारत में अमेरिका की तुलना में रिफ्यूजी कम हैं, इसकी कई वजहें हैं. हमारे देश की खुद की आबादी इतनी ज्यादा है कि ऐसे में बाहरी लोगों को रखना और रिसोर्सेज का बंटवारा करना मुश्किल है. इसी कारण से देश रिफ्यूजी कन्वेंशन 1951 का हिस्सा भी नहीं बना. हालांकि शरण लेने वालों के लिए देश की नीति हमेशा उदार रही.

Latest articles

भेल के आगा क्लब में इंटर स्कूल बास्केटबॉल टूर्नामेंट का भव्य आगाज़, 20 टीमें दिखा रहीं दम

भोपाल। भेल के आगा क्लब में बुधवार से तीन दिवसीय 'इंटर स्कूल बास्केटबॉल टूर्नामेंट...

तमिलनाडु में विजय का होगा ‘राजतिलक’, राज्यपाल से मिले, समर्थन का आंकड़ा हुआ पूरा

चेन्नई। तमिलनाडु में काफी मशक्कत के बाद आखिर टीवीके चीफ विजय को राज्यपाल से...

भोपाल के 90 डिग्री मोड़ वाले ब्रिज मामले में सस्पेंड इंजीनियरों के बहाल की तैयारी, मंत्री ने नोटशीट पर लिखा- बहाल कर दो

भोपाल। राजधानी भोपाल के चर्चित 90 डिग्री मोड़ वाले रेलवे ओवरब्रिज मामले में निलंबित...

भोपाल में टाइगर का मूवमेंट से दहशत में 7 गांव, 10 दिन में 5 गाय और भैंस का किया शिकार

भोपाल। भोपाल के बैरसिया रोड पर टाइगर के मूवमेंट से 7 गांवों के लोग...

More like this

सीजफायर तोड़ अमेरिका ने ईरान पर फिर बमबारी की, होर्मुज में 1500 जहाज फंसे

ट्रम्प बोले- डील नहीं की तो और हमले करेंगे तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी सेना ने ईरान...

अमेरिका-ईरान में फिर बढ़ा तनाव, होर्मुज में बने जंग जैसे हालात-सैन्य गतिविधियां जारी

वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है, जहां ईरान...

चीन के हुनान में पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट, 21 की मौत, 61 लोग घायल

बीजिंग। मध्य चीन के हुनान प्रांत से एक बेहद दर्दनाक और खौफनाक खबर सामने...