नई दिल्ली/पटना
जाति जनगणना को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। हालांकि केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दूसरा हलफनामा देकर मामले को शांत करने की कोशिश की। लेकिन बिहार में महागठबंधन सरकार ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह जनगणना का विरोध कर रही है। तेजस्वी यादव से लेकर तमाम नेता बीजेपी पर हमलावर होकर सामने आ गई। इसके बाद बीजेपी की ओर से सुशील मोदी ने साफ कर दिया कि बीजेपी जातीय सर्वे के पक्ष में हैं। बताया जा रहा है कि बिहार में जातीय जनगणना का काम लगभग पूरा हो चुका है। सर्वे होने के बाद डेटा का विश्लेषण हो रहा है।
कास्ट सर्वे से क्या फायदा
सूत्रों के अनुसार डेटा का विश्लेषण होने के तुरंत बाद न सिर्फ इसके आंकड़े सार्वजनिक किए जाएंगे, बल्कि इसके बाद ओबीसी आरक्षण की सीमा भी बढ़ाई जा सकती है। उधर कांग्रेस ने मध्य प्रदेश चुनाव से पहले भी वहां जीतने के बाद जाति जनगणना कराने का वादा किया है। जाति जनगणना के दबाव के बीच केंद्र सरकार ने 2021 का सामान्य जनगणना को टाल दिया था। हालांकि इसके लिए कोविड को कारण बताया गया था। लेकिन जिस तरह राज्य दर राज्य जाति जनगणना पर राजनीति हो रही है, आने वाले दिनों में इसपर कई और उठापटक देखा जा सकता है।
मंडल बनाम कमंडल की राजनीति तो नहीं?
बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए के हिंदुत्व को विपक्ष जातीय समीकरण से काउंटर करने की कोशिश कर रही है। विपक्ष इसे मंडल बनाम कमंडल के सियासी पिच पर ले जाने की कोशिश कर रहा है। इसीलिए जातीय जनगणना को आक्रामक रूप से आगे किया जा रहा है। अब क्षेत्रीय दलों के साथ कांग्रेस भी इस मांग पर पूरी ताकत से कूद चुकी है।
बीजेपी क्यों कर रही काउंटर
ऐसी पूरी संभावना बन रही है कि अगले साल आम चुनाव में यह एक मुद्दा रहेगा। बीजेपी ने इसे भांपते हुए अभी से इसको काउंटर करना शुरू कर दिया है। चूंकि विपक्ष इसे ओबीसी और पिछड़ी जातियों के हितों से जोड़कर पेश कर रही है, बीजेपी इसे पूरी तरह खारिज भी नहीं कर सकती है, क्योंकि हाल के वर्षों में यह बीजेपी का निर्णायक वोट बैंक रहा है।
