17.1 C
London
Wednesday, April 29, 2026
Homeराजनीतिएग्जिट पोल पर 2004 की याद दिला रहे बीजेपी विरोधी, आखिर 20...

एग्जिट पोल पर 2004 की याद दिला रहे बीजेपी विरोधी, आखिर 20 साल पहले हुआ क्या था?

Published on

नई दिल्ली

एग्जिट पोल में बीजेपी और उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए को बड़ी बढ़त का इशारा मिलते ही विपक्ष लाल हो गया। कांग्रेस, सपा, आरजेडी से लेकर कई विपक्षी दलों ने कहा कि यह दरअसल बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के इशारे पर पेश किया गया अनुमान है। उनका दावा है कि असली रिजल्ट एग्जिट पोल के विपरीत आएगा और विपक्ष 295 सीटें जीतकर सरकार बनाएगा। वहीं, ऐसे बीजेपी और मोदी विरोधी भी भरे पड़े हैं जो बीजेपी की तरफ से ‘अबकी बार 400 पार’ का नारा आने के बाद से ही याद दिला रहे हैं कि 2004 में भी कुछ हुआ था। वो बता रहे हैं कि कैसे 2004 में भी सत्ता पक्ष को लेकर बड़े रोजी पिक्चर बनाए जा रहे थे, सारे एग्जिट पोल भी सरकार की वापसी की घोषणा कर रहे थे, लेकिन असली परिणाम आया तो सारे अनुमान और दावे हवा-हवाई हो गए। तो क्या, सच में इस बार भी 2004 जैसे परिणाम आ सकते हैं? क्या 2004 में अटल सरकार की तरह ही इस बार भी मोदी सरकार की विदाई हो सकती है? सबसे बड़ा सवाल कि क्या सच में 2004 में कांग्रेस ने बीजेपी को बुरी तरह परास्त किया था? आइए इन सवालों के जवाब ढूंढते हुए यह जानने की कोशिश करते हैं कि इस बार का माहौल भी 2004 जैसा ही है, उसी के आसपास है या फिर बिल्कुल विपरीत…

1998 में बनी थी अटल सरकार और 13 महीने में हुई थी धड़ाम
1999 में बीजेपी ने 182 सीटें जीतकर केंद्र में सरकार बनाई थी। दरअसल अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार 1998 में ही बन गई थी, लेकिन तमिलनाडु के सहयोगी दल एआईएडीएमके के हाथ खींचने से मात्र एक वोट से सिर्फ 13 महीनों में ही सरकार ने विश्वास मत खो दिया था। तब विपक्षी दल मिलकर सरकार नहीं बना पाए थे, इसलिए चुनाव हुआ था। 1999 के उस चुनाव में बीजेपी 182 सीटें लेकर दोबारा सरकार में आ गई। पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। उससे पहले वो दो बार प्रधानमंत्री बन चुके थे, लेकिन पहली बार तो सिर्फ 13 दिन में सरकार गिर गई थी। 1999 में दूसरी बार बनी सरकार का हश्र ऊपर बताया जा चुका है।

1999 में तीसरी बार बनी अटल सरकार ने पूरा किया कार्यकाल
तीसरी बार अटल बिहारी की सरकार ने पांच साल पूरा किया तो उसके कई योजनाओं की बड़ी तारीफ हुई। अटल सरकार ने स्वर्णिम चतुर्भज योजना, नई टेलिकॉम पॉलिसी, सर्व शिक्षा अभियान, पोखरण में परमाणु परीक्षण, चंद्रयान-1 मिशन, केंद्रीय मंत्रालय में उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए नए विभाग का गठन जैसे कई क्रांतिकारी काम किए। अटल सरकार ने विनिवेश मंत्रालय बनाकर निजीकरण को बढ़ावा दिया और घाटे में जा रही कई सरकारी कंपनियों से किनारा कर लिया। 2004 में बीजेपी ने ‘इंडिया शाइनिंग’ के नारे के साथ मतदाताओं से अटल सरकार की वापसी का मौका देने की अपील की। ऐसा लग रहा था मानो जनता अटल सरकार की उपलब्धियों से बहुत खुश है और उसे एक और मौका देने का मन बना चुकी है। एग्जिट पोल्स में भी अटल सरकार की वापसी बताई गई, लेकिन जब मतगणना शुरू हुई तो रिजल्ट पलट गए।

2004 में क्या हुआ था जिसकी याद दिला रहा विपक्ष?
बीजेपी ने 2004 के लोकसभा चुनाव में 364 कैंडिडेट उतारे थे। पार्टी को 37.91% की स्ट्राइक रेट से 138 सीटों पर जीत हासिल हुई। वहीं, कांग्रेस पार्टी की स्ट्राइक रेट 34.77% रही और उसके कुल 417 उम्मीदवारों में 145 चुनकर संसद पहुंचे। यानी, बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस को सिर्फ सात सीटें ज्यादा आईं। जहां तक वोटों की बात है तो बीजेपी को कुल 8 करोड़, 63 लाख, 71 हजार, 561 यानी कुल 22.61% वोट मिले। वहीं, कांग्रेस को 10 करोड़, 34 लाख, 8 हजार, 949 यानी 26.53% वोट मिले थे। इस लिहाज से देखें तो बीजेपी को प्रति कैंडिडेट औसतन 2,37,284 वोट मिले थे जबकि कांग्रेस के लिए यह आंकड़ा 247,983 रहा था। इस चुनाव में बीजेपी को उत्तर प्रदेश से बहुत बड़ा झटका मिला था। पांच साल पहले जिस उत्तर प्रदेश ने बीजेपी को 29 सांसद दिए थे, वहां वो 10 सीटों पर सिमट गई थी। एक प्रदेश में ही 19 सीटों का घाटा। कांग्रेस ने तब यूपी में नौ सीटें हासिल कर ली थी। कांग्रेस को 2004 के चुनाव में सबसे अधिक आंध्र प्रदेश से 29 सीटें मिल गई थीं। वहीं बीजेपी को सबसे ज्यादा 25 सीटें मध्य प्रदेश से मिली थीं।

कांग्रेस को वोट तो 1999 में भी ज्यादा मिले थे, लेकिन…
मजे की बात है कि इस चुनाव में भी कांग्रेस को बीजेपी के मुकाबले ज्यादा वोट मिले थे। तब कांग्रेस को 10,31,20,330 यानी 28.30% जबकि बीजेपी को 8,65,62,209 यानी 23.75% वोट मिले थे। बीजेपी को 1999 में 53.69% के स्ट्राइक रेट से 182 सीटों पर जीत मिली थीं। उसने कुल 339 कैंडिडेट चुनाव मैदान में उतारे थे। उस चुनाव में बीजेपी को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 29-29 सीटें मिली थीं जबकि कांग्रेस को यूपी में क्रमशः 10 और 11 सीटें मिली थीं। उसे सबसे ज्यादा 18 सीटें कर्नाटक से मिली थीं जबकि आंध्र प्रदेश से उसे सिर्फ 5 सीटें मिली थीं। साफ है कि 2004 के चुनाव में जिस तरह उत्तर प्रदेश ने बीजेपी को तगड़ा झटका दिया, उसके उलट आंध्र प्रदेश ने कांग्रेस को बड़ी बढ़त दिला दी।

ये है 2004 को लोकसभा चुनाव की सच्चाई
तो ध्यान रहे कि 2004 में कांग्रेस पार्टी को बीजेपी पर सिर्फ सात सीटों की बढ़त मिली थी। कांग्रेस ने पहली बार गठबंधन सरकार चलाने का फैसला किया और नतीजों के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए का गठन हुआ। सारे साथी दलों के दम पर यूपीए के खाते में 208 सीटें आ गईं जबकि एनडीए के पास 181 सीटें ही रहीं। लेकिन एग्जिट पोल में कहा गया था कि एनडीए को 230 से 275 सीटें तक आ सकती हैं। वहीं, कांग्रेस को अधिकतम 205 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। एग्जिट पोल्स ने बताया था कि एनडीए को कांग्रेस के मुकाबले 80 से 100 सीटें ज्यादा आएंगी। यानी, एनडीए में सिर्फ बीजेपी की बात करें तो उसे कांग्रेस के मुकाबले बहुत कम अंतर से बढ़त दी गई थी। असली रिजल्ट में यह अंतर उलट गया और कांग्रेस ने मात्र सात सीटों के मामूली अंतर से बीजेपी पर बढ़त बना ली थी। हालांकि, एनडीए को एग्जिट पोल के अनुमानों के लिहाज से 50 से 60 सीटें कम मिली थीं।

तो क्या इस बार भी पलट सकता है एग्जिट पोल रिजल्ट?
2024 के लोकसभा चुनावों के एग्जिट पोल आए तो एनडीए को सबने कम से कम 350 सीटें दीं। 543 सीटों की लोकसभा में सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा 274 है। अगर यह मान भी लें कि इस बार भी 2004 का पैटर्न दुहरा सकता है तो एनडीए को असली रिजल्ट में (350 – 60) कम से कम 290 सीटें आ जाएंगी। यानी सरकार की वापसी तय। दूसरी दलील दी जाती है कि मोदी सरकार के ‘विकसित भारत’ और ‘मोदी की गारंटी’ की हवा भी ‘इंडिया शाइनिंग’ की तरह ही निकल सकती है। असंभव तो कुछ नहीं, लेकिन यह विरोधी भी जानते हैं कि अटल-आडवाणी की बीजेपी और मोदी-शाह की भाजपा में कितना अंतर है। अटल-आडवाणी के वक्त चुनावों की बूथ लेवल माइक्रो मैनेजमेंट की संकल्पना आई भी नहीं थी जिसे मोदी-शाह की बीजेपी 2014 से ही जमीन पर उतार रही है।

Latest articles

छत्तीसगढ़ में बुजुर्गों के लिए मजबूत सुरक्षा कवच: सम्मान और आत्मनिर्भरता पर साय सरकार का जोर

रायपुर। छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा और समग्र...

गाँव-ढाणी तक पहुँचेगी विकास की गूँज: 15 दिवसीय ‘ग्राम रथ अभियान’ का भव्य शुभारंभ

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्यसभा सांसद नितिन नवीन ने आज 'ग्राम...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से डेनमार्क के राजदूत की शिष्टाचार भेंट: राजस्थान में निवेश और तकनीकी सहयोग पर हुई चर्चा

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आज मुख्यमंत्री आवास पर डेनमार्क के राजदूत...

राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने पर सियासत तेज, किरणबीर कंग ने सीएम मान के बयान की निंदा की

संगरूर। पंजाब लोकराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरणबीर सिंह कंग ने आम आदमी पार्टी...

More like this

एक जिला एक उत्पाद’ नीति से राजस्थान के स्थानीय उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने...

1 अप्रैल से भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदना होगा महंगा, 740 लोकेशन पर बढ़ेगी कलेक्टर गाइड लाइन

भोपाल राजधानी भोपाल में 1 अप्रैल से प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा। जिले की कुल...

इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी को बचाने के लिए कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन: पट्टा धारियों के घर तोड़ने की कार्रवाई का विरोध

भोपाल राजधानी के वार्ड 66 स्थित इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी के निवासियों के आशियानों पर मंडरा...