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Tuesday, May 5, 2026
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कनपटी पर बंदूक सटाकर फैसला नहीं करा सकते…अध्यादेश मुद्दे पर कांग्रेस का AAP पर पलटवार

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नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकता की कवायद के बीच कांग्रेस और आम आदमी पार्टी आपस में भिड़ गई हैं। मुद्दा है दिल्ली को लेकर मोदी सरकार के लाए अध्यादेश का। AAP ने दो टूक कह दिया है कि जब तक कांग्रेस अध्यादेश के खिलाफ संसद में वोटिंग का भरोसा नहीं देती, तबतक वह उसके साथ किसी गठबंधन या मीटिंग में शामिल नहीं होगी। अपनी नाराजगी के इजहार के लिए पार्टी ने शुक्रवार को पटना में हुई विपक्षी दलों की बैठक के बाद जॉइंट प्रेस ब्रीफिंग का बहिष्कार किया। दूसरी तरफ कांग्रेस के तेवर भी सख्त है। उसने भी टका सा जवाब दिया है कि अपनी बात मनवाने के लिए हमारी कनपटी पर बंदूक मत रखिए।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव केसी वेणुगोपाल को इस मुद्दे पर टीएमएसी और नैशनल कॉन्फ्रेंस का भी साथ मिला है। दोनों पार्टियों ने दिल्ली अध्यादेश के मुद्दे को पटना की मीटिंग का मेन पॉइंट बनाने की अरविंद केजरीवाल की कोशिशों पर सवाल उठाया है।

कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी की तरफ से जारी बयान की भाषा पर भी सख्त ऐतराज जताया है। खरगे ने AAP के बयान को ‘भड़काऊ’ करार दिया है। वहीं कांग्रेस महासचिव वेणुगोपाल ने कहा, ‘आप हमारी कनपटी पर बंदूक रखकर फैसला लेने के लिए नहीं कह सकते।’

कांगरेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्षी दल संसदीय मुद्दो पर तब चर्चा करते हैं जब सत्र चल रहा होता है। आम आदमी पार्टी के नेता भी संसद में विपक्ष की रणनीति तय करने के लिए बुलाई बैठकों में शामिल होते हैं। खरगे ने अध्यादेश पर कांग्रेस का स्टैंड क्लियर करने के केजरीवाल की जिद पर हैरानी जताई।

दूसरी तरफ, नैशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने भी केजरीवाल को अगस्त 2019 की याद दिलाई जब उन्होंने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने के मुद्दे पर मोदी सरकार का समर्थन किया था। यही सवाल एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी भी उठा रहे हैं लेकिन वह पटना में हुई विपक्ष की बैठक का हिस्सा नहीं थे। लेकिन अब्दुल्ला इस मीटिंग में शामिल हुए थे।

टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भी अरविंद केजरीवाल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब मीटिंग का अजेंडा पहले से ही सबको पता था तो केजरीवाल दिल्ली के मुद्दे को क्यों थोप रहे थे।

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