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छत्तीसगढ़ : चावल चोरी के शक में दलित को पेड़ से बांध पीट-पीट कर हत्या, पुलिस ने मामले में लिया ये एक्शन

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नई दिल्ली

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में रविवार की सुबह चावल चोरी के शक में एक दलित शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। हत्या करने के आरोप में एक आदिवासी शख्स समेत तीन लोगों को पुलिस ने अरेस्ट किया है। कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह मॉब लींचिंग है। वहीं पुलिस ने कहा कि यह बीएनएस के तहत क्राइम की परिभाषा में नहीं आता है।

यह पूरी घटना डुमरपल्ली गांव में रात करीब 2 बजे के आसपास हुई है। मामले में जो मुख्य आरोपी वीरेंद्र सिदार है। उसने कहा किसी आवाज की वजह से उसकी नींद खुल गई और जब वह जागा तो उसने पीड़ित पंचराम सारथी उर्फ बुटू को अपने घर में घुसते और चावल की बोरी को चुराने की कोशिश करते हुए देखा। इसे देखकर उसे काफी गुस्सा आया और उसने अपने पड़ोसियों को आवाज लगाई। इसके बाद अजय प्रधान और अशोक प्रधान पहुंचे। फिर तीनों ने साथ में मिलकर सारथी को पेड़ से बांध दिया।

पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, गांव के सरपंच ने सुबह मामले की जानकारी पुलिस को दी और जब सुबह 6 बजे वहां पर पुलिस पहुंची तो सारथी बेहोश था और वह पेड़ से ही बंधा हुआ था। पुलिस सूत्रों ने दावा किया कि उसे बांस की डंडियों से पीटा गया और लात-घूंसों से मारा गया। अरेस्ट किए गए तीन लोगों पर बीएनएस की धारा 103 (1) के तहत हत्या का केस दर्ज किया गया है। इतना ही नहीं पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

कार्यकर्ताओं ने क्या मांग की
साथ ही अब इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है। कार्यकर्ताओं ने मॉब लीचिंग के प्रावधान को लागू करने की डिमांड की है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (2) में मॉब लिंचिंग को इस तरह से बताया गया है, ‘जब पांच या उससे ज्यादा लोगों का ग्रुप मिलकर नस्ल, जाति या समुदाय, लिंग, जन्म स्थान, भाषा, व्यक्तिगत विश्वास या किसी अन्य समान आधार पर हत्या करता है, तो ऐसे समूह के प्रत्येक सदस्य को मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी और जुर्माना भी देना होगा।’

सोशल एक्टिविस्ट ने मामले पर क्या कहा
वकील और सोशल एक्टिविस्ट डिग्री प्रसाद चौहान ने कहा, ‘इससे कोई भी फर्क नहीं पड़ता है कि उस पर हमला करने के पीछे क्या वजह थी। क्या वे कानून को अपने हाथ में ले सकते हैं। यह मॉब लिंचिंग का मामला है।’ लेकिन एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि बीएनएस की धारा 103 (2) में बताए गए मानदंडों को पूरा नहीं करता है।

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