कोरोना वायरस महामारी का खतरा बेशक कम हो गया है लेकिन इससे बचने के लिए जो वैक्सीन लगाई गई थीं, उनके गंभीर साइड इफेक्ट्स अब तक सामने आ रहे हैं। हाल ही में कोविशील्ड के दुष्प्रभाव की खबरें सुनने को मिली थी, अब खबर है कोवैक्सिन के भी कुछ गंभीर दुष्परिणाम सामने आए हैं।
कोवैक्सिन, भारत की कंपनी भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोविड-19 वैक्सीन है। TOI की एक खबर के अनुसार, हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में दावा किया गया है कि कोवैक्सिन लेने वाले लगभग एक तिहाई यानी हर 3 में से एक व्यक्ति को टीका लगने के एक साल के अंदर कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा।बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) द्वारा किया गया यह शोध ‘ड्रग सेफ्टी’ नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। चलिए जानते हैं पूरा मसला क्या है।
कोवैक्सिन के दुष्परिणाम
भारतीय वैज्ञानिकों ने बताया है कि कोवैक्सिन शॉट्स लेने वाले 900 से अधिक लोगों में से एक-तिहाई लोगों को कई तरह के प्रतिकूल प्रभाव देखे गए हैं जबकि लगभग 50% किशोरों में ऊपरी श्वसन पथ में संक्रमण पाया गया है।
मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियां
इसी अध्ययन में यह भी बताया गया है कि कोवैक्सिन लेने वाली करीब 5% महिलाओं को मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियां हुईं।
त्वचा विकार और सिरदर्द
अध्ययन में बताया गया है कि टीका लगवाने अधिकतर लोगों के सामान्य विकार ठीक हो गए थे लेकिन बहुत से लोगों में त्वचा संबंधी विकार 8।5 महीने के बाद भी बने रहे। लगभग 5% वयस्कों और किशोरों ने 9 महीने के बाद भी सिरदर्द बने रहने की शिकायत की।
कोविशील्ड के भी हैं कई साइड इफेक्ट्स
गौरतलब है कि यह अध्ययन ऐसे समय में सामने आया है, जब दवा कंपनी अस्ट्राजेनेका यह स्वीकार कर चुकी है कि उनकी कोविड-19 वैक्सीन टेक्नोलॉजी, जिसका इस्तेमाल भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कोविशील्ड वैक्सीन बनाने में किया है, बहुत ही कम मामलों में खून के थक्के जमने और प्लेटलेट्स की संख्या कम होने का कारण बन सकती है। इस स्थिति को ‘थ्रोम्बोसिस विथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम (टीटीएस)’ भी कहा जाता है।
कैसे हुआ अध्ययन
कोविशील्ड के बाद कोवैक्सिन भारत में दूसरी सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली कोविड-19 वैक्सीन थी। अध्ययन में बताया गया है कि शोधकर्ताओं ने इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज से 926 लोगों को शामिल किया। ये सभी लोग कोवैक्सिन ले चुके थे। शोधकर्ताओं ने इन लोगों से टीका लगने के एक साल बाद होने वाले दीर्घकालिक “विशेष रूप से महत्वपूर्ण प्रतिकूल घटनाओं (एईएसआई)” के बारे में पूछा। अध्ययन के मुताबिक करीब 48% किशोरों और 43% वयस्कों में वायरल ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण की परेशानी सामने आई।
