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क्रीमिया पुल ब्लास्ट, यूक्रेन में हमले… क्या तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही दुनिया?

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मॉस्को/नई दिल्ली

रूस-यूक्रेन युद्ध ने सोमवार को एक नया मोड़ लिया। अपने आठ महीने पूरे करने की ओर बढ़ रही यह लड़ाई एक बार फिर तेज हो गई है। सोमवार को रूस ने कीव, लवीव और खारकीव सहित पूरे यूक्रेन में 83 मिसाइलें दागीं। रूस का यह हमला युद्ध के शुरुआती दिनों की याद दिलाता है जिसने एक बार फिर देशों के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है? विशेषज्ञ वैश्विक नेताओं को तीसरे विश्व युद्ध के बारे में सोचने से भी बचने की सलाह दे रहे हैं। सोमवार के हमले ऐसे समय पर हुए हैं जब दो दिन पहले रूसी शान के ‘प्रतीक’ क्रीमिया पुल पर धमाका हुआ था। क्रेमलिन ने इसके पीछे यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराया है।

तीसरे विश्व युद्ध की संभावना के बारे में पूछे जाने पर रक्षा विशेषज्ञ कर्नल (रिटायर्ड) वीएन थापर ने हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ नवभारत से कहा, ‘मैं ईश्वर से प्रार्थना करूंगा कि चीजें उस दिशा में (तीसरे विश्व युद्ध) न जाएं। मेरा मानना है कि अगर वैश्विक नेताओं का दिमाग सही है तो इस तरफ सोचना भी नहीं चाहिए और न ही कोई कदम उठाना चाहिए। इसे गंभीरता से लेना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि यूक्रेन इस लड़ाई के बाद बर्बाद हो जाएगा।

‘चुप नहीं रहेगा दुनिया का दूसरा सबसे ताकतवर देश’
यूक्रेन में सोमवार को हुए हमलों को लेकर वीएन थापर ने कहा, ‘आज तो रूस ने सिर्फ पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर को टारगेट किया है। आप कैसे सोच सकते हैं कि रूस चुप रहेगा जब उसके खिलाफ इतना बड़ा खतरा पैदा किया जा रहा है। क्या अमेरिका चुप रहेगा अगर रूस या चीन कनाडा में एक बेस बना दें? तो आप कैसे सोच सकते हैं कि दुनिया का दूसरा सबसे शक्तिशाली देश बैठा देखता रहेगा।’ उन्होंने कहा कि युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों के कई दृष्टिकोण हैं जिसमें सबसे बड़ा दृष्टिकोण उनके हथियार उद्योग का है।

‘जब तक चलती रहेगी लड़ाई, बिकते रहेंगे हथियार’
थापर ने कहा कि जब तक यह लड़ाई चलती रहेगी, उनका हथियार उद्योग चलता रहेगा जिस पर उनकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक निर्भर करती है। पश्चिम पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि लड़ाई शुरू होने के एक महीने बाद पुतिन और जेलेंस्की के बीच जंग खत्म करने और समझौते को लेकर कुछ बातचीत हुई थी। लेकिन ब्रिटेन के तत्कालीन पीएम बोरिस जॉनसन वहां गए, उस बातचीत में बाधा डाली और उस समझौते को खत्म करवाकर आ गए। उनका असली मुद्दा है कि यह लड़ाई चलती रहे और रूस कमजोर हो जाए।

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