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अमित शाह की आलोचना पड़ी भारी! रालोद अध्‍यक्ष जयंत चौधरी ने अपने सभी प्रवक्‍ताओं की कर दी छुट्टी

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लखनऊ:

गृह मंत्री अमित शाह के बाबा साहेब आंबेडकर पर दिए गए एक बयान की आलोचना करना रालोद के प्रवक्‍ता को भारी पड़ गया। राष्‍ट्रीय लोकदल ने पार्टी के सभी प्रवक्‍ताओं को पद से हटा दिया है। रालोद की तरफ से एक विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी गई है कि राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष जयंत चौधरी के आदेश के बाद प्रवक्‍ताओं को पद से हटाया गया है। रालोद के संगठन महासचिव त्रिलोक त्‍यागी ने इस बाबत चिट्ठी जारी की है।

गौरतलब है कि रालोद बीजेपी का सहयोगी दल है। रालोद प्रवक्‍ता कमल गौतम ने कहा था कि डॉ आंबेडकर पर अमित शाह का बयान सही नहीं है। बाबा साहेब को लोग भगवान मानते हैं और मानते रहेंगे। रही बात सरकार की आप लोग कानून व्‍यवस्‍था के आदमी हैं। भगवान के मंदिर में भी अत्‍याचार हो रहा है। मंदिर में घुसने पर भी मार पिटाई हो रही है। ऐसे मामलों में कोई कारवाई नहीं कर रहे। ऐसे बयान की आवश्‍यकता नहीं है। हम गृह मंत्री से माफी मांगने की अपील करते हैं।

फजीहत के बाद उठाया ऐसा कदम
रालोद प्रवक्‍ता कमल गौतम के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने बीजेपी और जयंत चौधरी को ट्रोल करना शुरू कर दिया। माना जा रहा है कि भारी फजीहत के बाद रालोद ने अपने सभी प्रवक्‍ताओं को पद से हटाने का फैसला लिया है। प्रवक्‍ताओं के नए पैनल का ऐलान जल्‍द किया जाएगा।

अमित शाह ने असल में क्या कहा था?
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 17 दिसंबर को राज्यसभा में संविधान पर चर्चा के दौरान कहा था कि अभी एक फैशन हो गया है.. आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर. इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता. उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर हमला जारी रखते हुए कहा था कि हमें तो आनंद है कि आंबेडकर का नाम लेते हैं. आंबेडकर का नाम अभी सौ बार ज्यादा लो. परंतु आंबेडकर जी के प्रति आपका भाव क्या है ये मैं बताता हूं. आंबेडकर जी को देश कि पहली कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दे दिया.

गृह मंत्री ने आगे कहा था कि उन्होंने (आंबेडकर) कई बार कहा कि वह अनुसूचित जातियों और जनजातियों के साथ होने वाले व्यवहार से असंतुष्ट हैं. उन्होंने सरकार की विदेश नीति से असहमति जताई थी, अनुच्छेद 370 से भी सहमत नहीं थे. आंबेडकर को आश्वासन दिया गया था, जो पूरा नहीं हुआ, इसलिए कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था. “अमित शाह यहीं नहीं रुके, उन्होंने इसके बाद जवाहरलाल नेहरू का एक बयान भी पढ़ा जो आंबेडकर के इस्तीफे के बारे में दिया गया था. उन्होंने कहा, “श्री बीसी रॉय ने पत्र लिखा कि आंबेडकर और राजाजी जैसे दो महानुभाव मंत्रिमंडल छोड़ेंगे तो क्या होगा, तो नेहरू जी ने उनको जवाब में लिखा है- राजाजी के जाने से तो थोड़ा बहुत नुकसान होगा, आंबेडकर के जाने से मंत्रिमंडल कमजोर नहीं होता है.” अमित शाह का पूरा भाषण यहां सुना जा सकता है.

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