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ट्रंप राज में अमेरिका ने क्‍या यूक्रेन को दे दिया धोखा? संयुक्‍त राष्‍ट्र में रूस का खुलकर दिया साथ, घबराए यूरोपीय देश

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वॉशिंगटन

अमेरिका में सत्‍ता में बदलाव का असर अब साफतौर पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका ने अपनी नीतियों में बहुत बड़ा बदलाव करते हुए संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के खिलाफ आए प्रस्‍ताव में पुतिन का साथ दिया है। सोमवार को अमेरिका ने अपनी कई साल से चली आ रही नीति को बदलकर पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया। रूस के यूक्रेन पर पर हमले के 3 साल पूरे होने पर अमेरिका का यह कदम रूस के लिए सबसे बड़े गिफ्ट की तरह से है। यही नहीं जी7 देशों की ओर से रूसी हमले की आलोचना करने के लिए जारी बयान में भी अमेरिका के हस्‍तक्षेप के बाद उसे हल्‍का कर दिया गया और रूस को हमलावर मानने से इंकार कर दिया गया। अमेरिका के इस कदम से यूरोपीय देश बुरे फंस गए हैं। अब तक अमेरिका और यूरोपीय देश रूस के खिलाफ जंग में एक साथ थे लेकिन अब अमेरिका ने पाला बदल लिया है। इससे यूरोपीय देश ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

अमेरिका के इसी बदलाव की वजह से फ्रांस के राष्‍ट्रपति मैक्रों वॉशिंगटन पहुंचे हैं। संयुक्‍त राष्‍ट्र में वोटिंग के लिए आया प्रस्‍ताव यूक्रेन और यूरोपीय देशों की ओर से आया था। इसमें अमेरिका ने रूस का समर्थन किया जिसमें मास्‍को को हमलावर नहीं माना गया है या यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता को भी स्‍वीकार नहीं किया गया है। यह प्रस्‍ताव यूरोप के सदस्‍य देशों के समर्थन के बिना ही संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद से पारित हो गया। अमेरिका ने यह कदम ऐसे समय पर उठाया है जब ट्रंप प्रशासन रूस के साथ मिलकर यूक्रेन युद्ध को खत्‍म करने के लिए लंबी बातचीत कर रहा है।

रूस को नहीं बताया हमलावर
अमेरिका के राष्‍ट्रपति खुलकर यूक्रेन के राष्‍ट्रपति जेलेंस्‍की को तानाशाह कह रहे हैं। साथ ही जेलेंस्‍की पर पद छोड़ने का दबाव भी डाल रहे हैं। जेलेंस्‍की ने भी शर्त रखी है कि अगर यूक्रेन को नाटो की सदस्‍यता दी जाती है तो वह पद छोड़ देंगे। यूरोप के समर्थन वाले प्रस्‍ताव को संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा में 93 वोट मिले। इसमें रूस से मांग की गई है कि वह तत्‍काल, पूरी तरह से और बिना शर्त सभी सैनिकों को यूक्रेन के क्षेत्र से हटा ले और उसे अंतरराष्‍ट्रीय मान्‍यता प्राप्‍त सीमा से बाहर ले जाए।

इसके जवाब में अमेरिका ने एक और प्रसताव महासभा में पेश किया जिसमें रूस को हमलावर नहीं बताया गया या यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता को स्‍वीकार किया गया। अमेरिकी प्रस्‍ताव में कहा गया कि युद्ध को तेजी से खत्‍म किया जाए और रूस तथा यूक्रेन के बीच शांति की अपील की गई है। अमेरिकी प्रस्‍ताव ने कहा कि संयुक्‍त राष्‍ट्र का मुख्‍य उद्देश्‍य अंतरराष्‍ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना है। साथ ही विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करना। अमेरिका यही प्रस्‍ताव सुरक्षा परिषद में भी लाया और इसे 10 वोट से पारित कर दिया गया। इसको रूस ने भी अपना सपोर्ट दिया। इस प्रस्‍ताव के दौरान 5 यूरोपीय देश अनुपस्थित रहे। रूस ने अमेरिका के प्रस्‍ताव की तारीफ की है।

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