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Saturday, June 20, 2026
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जहां नहीं चैना, वहां नहीं रहना, फडणवीस कैबिनेट में जगह न मिलने से दर्जन भर वरिष्ठ विधायक नाराज

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नागपुर

महायुति में घमासान। मंत्री न बनाए जाने से दर्जनभर से ज्यादा विधायकों ने खुलकर नाराजगी व्यक्त की है। कई विधायकों ने शीतकालीन सत्र से दूरी बना ली है। अजित पवार की पार्टी एनसीपी के वरिष्ठ विधायक छगन भुजबल ने तो ऐलान कर दिया है कि ‘जहां नहीं चैना, वहां नहीं रहना।’ सत्र छोड़कर भुजबल नासिक चले गए हैं, जहां वे अपने समर्थकों के साथ विचार विमर्श करेंगे। उनके तेवर देखकर उन्हें मनाने की कोशिश शुरू कर दी है। सत्र के पहले दिन उपमुख्यमंत्री अजित पवार नदारद रहे। बीजेपी के सुधीर मुनगंटीवार की भी नाराजगी सामने आई है। उनके बचाव में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सामने आए। नाराज नेताओं में भुजबल और मुनगंटीवार के अलावा शिंदे सेना के विधायक प्रकाश सुर्वे, विजय शिवतारे, दीपक केसरकर, तानाजी सावंत व रवि राणा समेत अन्य विधायक शामिल हैं। तानाजी सावंत ने अपने ट्विटर खाते से शिंदे की तस्वीर हटा दी है।

आश्वासन देने के बाद भी मंत्री नहीं बनाया
गौरतलब है कि रविवार की शाम को मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया। कुल 39 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। कई सारे दिग्गजों को आश्वासन देने के बाद भी मंत्री नहीं बनाया। अब वे पार्टी के लिए खुली चुनौती बनकर सामने आ गए हैं। अजित पवार की पार्टी एनसीपी के वरिष्ठ विधायक छगन भुजबल ने कड़े तेवर दिखाए है। सोमवार को शीतकालीन सत्र में भाग लेने नागपुर आए भुजबल ने खुलकर अपनी नाराजगी प्रकट की।

हां, मैं नाराज हूं
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि हां, मैं नाराज हूं, अब आगे क्या ? आपको उन लोगों से सवाल करना चाहिए, जिन्होंने मुझे मौका नहीं दिया। उन्होंने कहा कि सात-आठ दिनों पहले मंत्री पद की एवज में राज्यसभा जाने का ऑफर दिया गया था, लेकिन मैंने राज्यसभा जाने के लिए मना कर दिया था। उस वक्त मैंने बैठक में कहा था कि जब मुझे राज्यसभा भेजना ही था तो फिर विधानसभा का चुनाव क्यों लड़ाया गया ? अब मैं राज्यसभा नहीं जा सकता। यह बात कहकर वे अपने गृह नगर नासिक के लिए रवाना हो गए। भुजबल मंगलवार को समता परिषद के कार्यकर्ताओं से मिलेंगे और भविष्य की दिशा तय करेंगे। अजित गुट के अनिल पाटील भी मंत्री नहीं बनाए जाने को लेकर नाराज बताए जा रहे हैं।

तानाजी सावंत पुणे लौटे
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी में भी ऐसी हाल है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तानाजी सावंत नागपुर पहुंच गए थे, लेकिन वह अपना सामान लेकर पुणे चले गए। सावंत का कहना है कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, जिसके चलते डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है। शिंदे सेना के दूसरे नेता विजय शिवतारे ने कहा कि मेरे साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया है। अगर ढाई साल बाद मुझे मंत्री बनाया जाता है, तब भी मैं मंत्री नहीं बनूंगा। इससे पहले शिंदे गुट के भंडारा से विधायक नरेंद्र भोंडेकर ने रविवार को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने पर पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। विधायक प्रकाश सुर्वे, विजय शिवतारे, दीपक केसरकर सहित दूसरे विधायकों ने भी नाराजगी प्रकट की है।

मुनगंटीवार खफा
शीतकालीन सत्र के पहले दिन बीजेपी नेता सुधीर मुनगंटीवार अनुपस्थित रहे। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्हें मंत्री क्यों नहीं बनाया, यह तो उनसे पूछिए जिन्होंने मुझे मंत्री नहीं बनाया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रदेश बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने उन्हें मंत्री पद मिलने के बारे में बताया था, लेकिन बाद में क्या हुआ मुझे नहीं पता। उन्होंने रूठे मन से कहा कि वे नाराज नहीं हैं। पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी उसे निभाएंगे। जब उनसे पूछा कि पहले दिन विधानसभा क्यों नहीं आए, इस पर मुनगंटीवार ने कहा कि मुझे पता था कि अगर में विधानभवन गया तो लोग यहीं सवाल पूछेंगे। मेरा मानना है कि उन लोगों के सवालों के जवाब देने के बजाय मौन रहना उचित है। साथ ही विश्वास और धैर्य रखना चाहिए। दूसरी बात, पहले दिन विधानसभा में कोई काम भी नहीं था। मैं संगठन में विश्वास करने वाला व्यक्ति हूं। मुझे प्रमोद महाजन की बात याद आती है, वे कहते थे कि सच्चा कार्यकर्ता वही है जो मन के विपरीत कदम दर कदम काम को आगे बढ़ाता है।

मुनगंटीवार को मना रहे हैं- फडणवीस
मुनगंटीवार की नाराजगी पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्हें समझाने की कोशिश की जा रही है। उनकी सुधीर मुनगंटीवार के साथ बात हुई है। वे हमारे वरिष्ठ नेता हैं। पार्टी का इरादा कुछ लोगों को मंत्रिमंडल में न लेते हुए उन्हें कुछ खास जिम्मेदारी सौंपने का है। आखिरकार पार्टी और सरकार दोनों ही चलानी है। ऐसे में कई बार सरकार में काम करने वाले पार्टी का और पार्टी का काम करने वाले सरकार में काम करते हैं। सुधीर मुनगंटीवार बेहद अनुभवी नेता हैं। हमारे पार्टी नेतृत्व ने कुछ सोच विचार कर ही उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया।

अजित पवार भी नदारद
सदन में प्रवेश करते समय भुजबल ने काली जोधपुरी पोशाक पहनी थी और गले में लाल दुपट्टा लपेटा हुआ था। शायद वे काले रंग के जरिए मंत्री पद नहीं दिए जाने पर अपना विरोध दर्ज कराना चाहते थे। विधानमंडल परिसर में भी इसी बात की चर्चा थी। वहीं, सोमवार को सत्र के पहले दिन अजित पवार भी सदन में नहीं आए। चर्चा है कि कैबिनेट में जगह बना नहीं पाए वरिष्ठ मंत्रियों की नाराजगी से बचने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया।

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